एमएलसी में टूटा गाजियाबाद का दिल

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लखनऊ परिक्रमा ने भी नहीं दिखाया असर
प्रमुख संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। भाजपा ने रविवार दोपहर एमएलसी के सभी रिक्त स्थानों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। घोषणा पर सबकी नजरें थीं। खासतौर पर गाजियाबाद के कई प्रमुख चेहरे इस चुनाव में अपना भाग्य खुलने की हसरत पाल चुके थे। मगर हुआ वही जो हर बार होता आया है। गाजियाबाद के किसी भी कार्यकर्ता की किस्मत का ताला इस चुनाव में नहीं खुल पाया। भाजपा आलाकमान ने गाजियाबाद को पूरी तरह से इग्नोर कर दिया।
यह वही गाजियाबाद हैं जहां प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष, किसी मंत्री के आने पर कार्यकर्ता घंटों यूपी गेट पर डेरा डाले बैठे रहते हैं। पार्टी के बड़े-बड़े कार्यक्रमों के लिए यहां के नेता अपने कॉलेजों के दरवाजे हंसकर खोलते हैं। यह वही गाजियाबाद है जो भाजपा को लगातार मेयर देता आ रहा है। यह वही गाजियाबाद है जिसने पूरे देश में जनरल वीके सिंह को सबसे ज्यादा वोट देकर सांसद बनाया। यह वही गाजियाबाद है जहां पर जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपाई हैं।
यह वही गाजियाबाद है जिसने नगर निगम चुनाव में पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा पार्षद जितवाकर नगर निगम में भेजे हैं। यह वही गाजियाबाद है जिसके सभी पालिका चेयरमैन जीतकर आएं हैं तो सवाल यही उठ रहा है कि आखिर भाजपा के लिए भगवा की धूम मचाने वाले गाजियाबाद के हिस्से में एमएलसी की सीट क्यों नहीं आई। पिछली तीन योजना से भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजा वर्मा ने भागदौड़ में कोई कमी नहीं छोड़ी। किसान मोर्चा के पूरे प्रदेश में सबसे अधिक कार्यक्रम लगवाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष की वाहवाही बटोरी। मगर जब मौका आया तो उनका नाम लिस्ट से आउट हो गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता दिनेश गोयल ने जहां पहले राज्यसभा सांसद वाले मामले में अनिल अग्रवाल से झटका खाया है, वहीं अब चर्चा है कि कम से कम पार्टी के प्रति समर्पित इस सज्जन चेहरे को एमएलसी बनाकर सम्मान दिया जा सकता था, मगर ऐसा हुआ नहीं।
फिलहाल श्री गोयल के कॉलेज में फिर से 20, 21, 22 अप्रैल को भाजपा महिला प्रशिक्षण का राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर होना है। जिसके दरवाजे फिर से दिनेश गोयल ने खोल दिए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय मोहन, चंद्रमोहन शर्मा, पृथ्वी सिंह, अशु वर्मा, अशोक मोंगा, सरदार एसपी सिंह, अशोक गोयल जिन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी के प्रति समर्पित किया। पार्टी को गाजियाबाद में खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके नामों पर विचार तक नहीं हुआ। सवाल यही उठ रहे हैं कि कौन सा गाजियाबाद यह मांग रहा था कि इन सभी को एमएलसी बना दिया जाए।
कोई एक चेहरा भी एमएलसी बनकर आ जाता तो कार्यकर्ता यह सोच लेते कि पार्टी ने हमे कुछ दिया है। फिलहाल एमएलसी चुनाव की सूची जारी हो गई है और उसमें गाजियाबाद से किसी भी चेहरे का नाम न आना एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इनमें से कई नेताओं ने लखनऊ में कई दिनों से डेरा डाला हुआ था लेकिन सभी परिक्रमाएं परिक्रमा बनकर ही रह गई। वरिष्ठ समाजसेवी एवं सीडी के चीफ वॉर्डन ललित जायसवाल को लेकर भी कयास लगाए जा रहे थे मगर किस्मत ने एक बार फिर उनका साथ नहीं दिया।
करंट क्राइम ने पहले ही बता दिया था कि नहीं बनेगा कोई गाजियाबाद से उम्मीदवार
दैनिक करंट क्राइम ने अपने एक अंक में गाजियाबाद के इन सभी नामों के फोटो इसलिए प्रकाशित किए थे क्योंकि यह चेहरे एमएलसी चुनाव के लिए डिजर्व करते हैं, मगर हमने अपने अगले अंक में यह भी बताया था कि डिजर्व करने वाले यह चेहरे भले ही कितनी कोशिश करें मगर जो रणनीति आलाकमान स्तर पर बैठाई जा रही है उसके अनुसार गाजियाबाद के किसी भी नेता का नंबर नहीं लगने जा रहा है। करंट क्राइम की यह संभावना एमएलसी चुनाव के सूची जारी होते ही सटीक साबित हुई। घोषित दस उम्मीदवारों के नाम में गाजियाबाद के एक भी नेता को स्थान नहीं मिल पाया।