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ग़ाजियाबाद

जुबान संभाल के (25/05/2020)

भगवा गांव में वीरू टंकी पर चढ़ गया था

जब सीजन सोशल डिस्टेंस का चल रहा हैं तब भगवा गढ़ के भगवाईयो के शिकवे सोशल मीडिया पर निकल रहे हैं। अब ऐसे में सोशल मीडिया पर दफ्तर वाले प्रभारी जी ने पता नही किस लय में क्या लिखा लेकिन इतना जरूर समझ में आया कि राशन किट में किसी धांधली से वो नाराज हैं और धरना देने वाले हैं। इतने गुस्से में हैं कि कुर्सी की भी परवाह नही हैं। बात उनकी बिरादरी के नेता से चली तो उन्होने कहा कि अजी जाने भी दो इतना सीरियस लेने की जरूरत नही हैं। बस आप ये समझ लो कि शोले पिक्चर में वीरू दिन में ही टंकी पर चढ़ गया था लेकिन हमारा वीरू रात को सेंटीमेंटल होकर विचारों की टंकी पर चढ़ गया था। बताया कि भाई दिल का बहुत अच्छा हैं लेकिन बस ये ही कमी हैं थोड़ी सी। सच ये हैं कि जब से बिरादरी का नामित पार्षद बना हैं तब से भाई ने कसम खा ली है कि चुनाव जरूर लड़ना हैं। इसलिये पहली टंकार बिरादरी के नेता के घर के बाहर सुबह चार बजे जाकर दी। जुबान कड़वी हैं लेकिन दिल मीठा हैं। कमांडर का बहुत मुंह लगा है। पल पल की खबरे अपडेट करने का काम है। अभी तो उसके झोले में कई आईटम आप देखते रहो बस। गुस्सा हुया था लेकिन हमारा वीरू टंकी से उतर कर चुपचाप सो गया था सच्ची में।

कौन महिला नेता करती हैं अफसरो की काल रिकार्ड

भाजपा छाप यूथ वैश्य नेता ने अफसर की बातचीत वाली आडियो क्या वायरल कर दी कि तूफान आ गया। साथ वाले व्यापारी नेता भी अफसरो के आगे भले बनने के लिये उसकी बुराई कर रहे हैं। इस बीच बात चली तो जुबान से वो राज निकल गया जो अफसरों के लिये हाई अलर्ट हैं। पता चला कि एक महिला नेता का तो प्रिय शगल ही अफसरो से बातचीत की काल रिकार्ड करना हैं। फूड वालो से लेकर टू स्टार वालो की बातचीत के किस्से हैं। बताने वाले ने ये भी बताया कि व्यापारी,राजनेता,अधिकारी सब इस किस्सें में आते हैं। महिला नेता ने किसी के सामने रौब गालिब करने के लिये एक बार रिर्काडिड बातचीत किसी व्यापारी को सुनवा दी थी।

हमारें यहां तो कर्मचारी भी दर्जा प्राप्त हैं साहब

सरकार वालो की सबसे बड़ी खासियत हैं कि यहां आपसी तकरार राऊंड द मंथ चलती ही रहती हैं। भाजपा वाले दूसरे दल के नेता की तारीफ कर देगें लेकिन अपने दल के नेता की बात पर कुटिल मुस्कान आ जाती हैं। दायें बायें देखकर उसका शिजरा सामने वाले को बता कर ही सांस लेगें। अब दो बुजुर्गो की लड़ाई को तूल दिया जा रहा है। दोनो को जो कुछ भी मिला उन्होने उसे सिर माथे पर लिया। मगर सुर संग्राम भाजपा में ही हैं। कहा जा रहा है कि दोनो ही दर्जा प्राप्त मंत्री नही हैं। बात यूथ नेता की जुबान से निकली। उसने कहा कि अजी आप हमारी पार्टी के तो हाल ही मत पूछो। आप दर्जा प्राप्त मंत्री की बात कर रहे हो हमारे यहां तो दर्जा प्राप्त महानगर महामंत्री हैं। हमारें यहां तो नेता के वेतनभोगी कर्मचारी खुद को दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री मानते हैं। यहां तो पता नही कौन क्या क्या है।

उनके लक्षण तो हमारें दल से मिलते हैं

हाथ वालो के नेता पर जब से आरोप लगे हैं तब से वो हिन्दु दलो को अच्छे लगने लगे हैं। नेता जी का पहला मोर्चा पार्षद से खुला तो दूसरा मोर्चा सपा वाले नेता जी से खुल गया। अब हाथ वाले नेता जी की विचारधारा जो है वो उन्हे पता होगा लेकिन जिस तरह से उन पर आरोप लगे उससे उनकी टीआरपी हाथ वाले दल से ज्यादा केसरिया दल में हाई हो गई। हिन्दूवादी नेता ने ही कहा कि ऐसे नेताओं की तो हमारे दल में ज्यादा जरूरत हैं। वो तो बेकार में ही वहां टाईम वेस्ट कर रहे हैं। वो हमारे पास आ जाये और प्रदेश वाला पद तो हम उन्हे आते ही दिलवा देगें। ऐसे आदमी की तो हमें सख्त जरूरत हैं अपनी धर्म वाली लड़ाई लड़ने के लिये।

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