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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

जुबान संभाल के (23/10/2020)

पालिटिक्स में वरिष्ठ नेताओं की अहमियत

भगवा गांव में जब से वरिष्ठता के मुददे का करंट लगा है तब से गुमशुदा और गमशुदा दोनो ही आ लिये है कि हाय हमें कुछ ना मिलाजो वीआरएस ले चुके हैं उन्होने ही पालिटिकल वनवास काट रहे भगवा नेताओ के दिल के दर्द पर चुटकी ली। कहा कि वरिष्ठ नेता कोई पदवी नही होती।जिनके पास कुछ नही होता बताने को उनका परिचय वरिष्ठ नेता कहकर ही दिया जाता है।जब पार्टी ने अज्ञातवास काटा तुम्हे तब कुछ ना दिया तो अबकैसे पदवी मिल जायेगी। बता दिया कि मदिंर के प्रेसनोट बांट रहे मंगल बता दे कि फूल के लिये उसने क्या किया। कुछ करते तो पार्टी जरूर देती। येतो सही मेें पार्षद के लायक भी नही हैं। टिकट मिलता तो मौहल्ले में हारकरभी दिखा देते। खुद को वरिष्ठ कहकर दिल बहला रहे हैं। इस शिजरे में कई के नाम गिनाये। देसी से लेकर त्रिवेदी तक सवाल उठाये। कह दिया कि हम सवाल उठायेगें तो बवाल हो जायेगा। मौहल्ले के नेता भी अपने होर्डिंग में इन वरिष्ठो के फोटो तक नही लगाते। बैठको में इन्हे कोई नही बुलाता और रैली सभाओ में कोई वरिष्ठ नही जाता। भाईसाहब इन सीनियरों का इतिहास ही ऐसा है कि ये उपहास के ही लायक हैं।पार्टी पर सवाल उठा रहे हैं अपने रिपोर्टकार्ड लेकर आयें और कड़वा सच भी तो बताये साहब।

वो ओरेंज हुकूमत में अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े हैं

आरेंज हुकूमत में पांडेय जी के सामने अफसरो की पिंडली कांपने का ही जिक्र भगवा मेंबर ने किया तो अफसर आपे से बाहर हो गये थे। शकील ठेकेदार पर तो हर सरकार में मेहरबानी रही है। अब्दुल समद सेटिंग ही ऐसी बिठवा कर गये थे कि दिनेश सिंह कृपा बरकरार रहती हैं। बाबू भी हर सरकार में मजे ले ही रहे हैं। बात भगवा खेमें में आलराँऊंडर मौज वालों की चली तो बताया गया कि ये सब पिछले जन्मो के पुण्यों का फल हैं जो फूल वालो की सरकार में मिल रहा हैं। बता दिया कि ये सब तो वो हैं जो ओरेंज हुकूमत में अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े हैं। इन्हे जो रोकेगा उसे इनसे नही बल्कि चक्रवती सम्राटों से युद्व करना हैं। ऐसे घोड़े सब विभागो में हैं।

मैडम के कलर मैजिक का सियासी कहर

मैडम ने मेंबर अभियान में कभी डोर टू डोर जाकर बेल नही बजाई। नीरू शर्मा की तरह सबसे ज्यादा मेंबर भी नही बनाये। अर्चना सिहं की तरह सपा सरकार में भाजपा का झंडा बुलंद करते हुये हापुड़ चुंगी पर पुलिस की लाठी भी नही खाई। बूथ पर बस्ता भी नही संभाला और स्टीकर नही लगाये। मगर अफसरी मेहरबानी हुई तो मैडम फुल मौज में हैं। रंग से ही सियासी रंग आ गया। कलर का मैजिक ऐसा चला कि नाम का नाम और दाम के दाम वाला सीन हो गया। अब कलर वाले चाहते हैं कि बाकी सब तो डाऊन हो जायें और रीजनल वाला क्राऊन उनके सिर पर आ जायें।सुना है कि सिफारिश में लीडरी के साथ साथ अफसरी कलर भी आ गया हैं। बात भगवा लीडरों की जुबानी बाहर आई हैं। नवाबो के शहर वाले नेता तो खफा बताये जाते हैं। किसी से कह चुके हैं कि प्रोफाईल में शिक्षा और अवार्ड नही बल्कि पार्टी के लिये ग्राऊंडलेवल पर संघर्ष भी काऊंट होना चाहिये। फैमिली शिजरे और सिफारिश से बड़े नेताओं को बचना चाहिये।

दरोगा बोला टेबिल पीटी तो पिछवाड़ा पीट दूंगा तेरा

भगवा नेता किसी मामलें में पैरवी के लिये दरोगा के पास गये तो शुरूआत मुस्कान और चाय आफर से हुई। अब पूर्वांचल वाले नेता का पाला भी तो मुजफ्फरनगर वाले देहाती दरोगा से पड़ गया। नेता जी ने अपनी बात को सही साबित करने के लिये दरोगा की टेबिल को हाथ से जब दो बार पटका तो दरोगा ने नेता को पोलाईट होने को कहा।पालिटिक्स वाले जब पोलाईट नही हुये तो फिर दरोगा का पुलिसिया स्टाईल बाहर आ गया। साफ कह दिया कि इबजा टेबिल पिटटी तो तेरा पिछवाड़ा पीट दूंगा यहांसिका मैं।

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