गुरू तो बीएलओ हो गये

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पता नहीं कि गुरू दिवस कब हैप्पी टीचर डे में बदल गया। वैसे गुरू को देव का दर्जा दिया गया है लेकिन बोलचाल की भाषा में गुरू को कुछ और ही माना जाता है। कहा जाता है कि बहुत ही गुरू इंसान है तो सब समझ जाते हैं कि बंदा ओवर हैंडसम है। अब देखो ना चेला घंटाल शब्द नहीं है लेकिन गुरू घंटाल कहा ही जाता है। जब कहा जाता है कि बहुत ही उस्ताद हैं तो समझ में नहीं आता कि तारीफ हो रही है या फिरकी ली जा रही है। अब तो लवगुरू से लेकर मैनेंजमेंट गुरू तक मार्केट में आ गये हैं। गुरू तो द्रोणाचार्य भी थे लेकिन सुना है कि उस शिक्षा के बदले में अंगूठा मांग लिया था जो दी ही नहीं थी। बस पता चल गया कि गुरू मानकर मूर्ति लगा ली। इसी की रायल्टी में अंगूठा ले गये। एकलव्य अमीर होता तो अंगूठा सलामत रहता और फैसला गोल्ड अंगूठी पर हो जाता। गुरू रामानंद को भी भागीरथी तो दिखी लेकिन सीढ़ियो पर लेटे कबीर नहीं दिखे। ये उस दौर की बात है जब तुलसीदास ने भी लिख दिया था कि ढोल गंवार शूद्र पशु नारी ये सब ताड़न के अधिकारी। आज के दौर में होते तो एकलव्य,कबीर से लेकर तुलसी तक को पता चल जाता कि बेटा अब एक्ट आ गया है और शिक्षा बाद में देना पहले जेल चलो। गुरू तो पॉलिटिक्स में आते हैं। राजनाथ सिंह से लेकर मुलायम सिंह तक पॉलिटिक्स में ऐसे गुरू मिल जायेंगे जो कक्षा से सीएम के सिंहासन तक बैठे हैं। केंन्द्रीय सरकारों में मंत्री बने हैं। अब सबकी किस्मत ऐसी नहीं होती हैं। कुछ ऐसे भी गुरू हैं जिन्हे सरकार ने सरकारी स्कूल में नौकरी तो पढ़ाने की दी लेकिन बना दिया बीएलओ। महंगे अंगे्रजी स्कूलों में भी गुरू अब टीचर है और उसकी औकात नहीं है कि वह स्कूल के ग्राहक यानी छात्र को डांट भी दे। महंगे स्कूलो में तो आपको गुरू शब्द के गिरते मूल्य का मुजरा देखने को मिल जायेगा। महंगे स्कूलो में टीचर के लिये क्लास में कुर्सी नही होती अब। उसे बैठकर पढ़ाने की इजाजत नहीं हैं। सवाल यह है कि जो जीवन में शुरू ही नहीं हुए वो गुरू कैसे हो सकते हैं। जिस देश में शराब का ब्रांड नेम टीचर है वहां गुरू को देवता का दर्जा मिल कैसे सकता है। ठेका स्कूल के पास नहीं खुल सकता लेकिन टीचर ठेके पर मिल सकता है। चेला चीनी हो सकता है लेकिन गुरू के हिस्से में गुड़ बनना ही लिखा है। बहरहाल आज के दौर में गुरू दिवस पर अपनी वाणी इन शब्दों के साथ
गुरू नौकर शिष्य मालिक है पहने महंगा कोट
गुरू पैसा गुरू धन और गुरू है गड्डी का नोट