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किसानों को फसलों के दाम के तत्काल भुगतान की गारंटी: कृषि मंत्री

नई दिल्ली| केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को कहा कि कोई भी कानून अब तक किसानों को उनकी फसलों के दाम का भुगतान कब होगा इसकी गारंटी नहीं देता था, लेकिन कृषि विधेयक में तत्काल भुगतान की गारंटी दी गई है। उन्होंने कहा कि विधेयक में सिर्फ विशेष परिस्थिति में अधिकतम तीन दिन के भीतर किसानों को भुगतान करने का प्रावधान है। तोमर यहां कृषि विधेयकों पर एक प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे। कृषि विधेयक को लेकर पंजाब में किसानों के विरोध के मसले पर उन्होंने कहा कि किसानों को गुमराह कर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसान अब तक अपनी फसल मंडियों में औने-पौने भाव में बेचने को विवश थे, लेकिन अब उन्हें मंडी के बाहर देश में कहीं भी फसल बेचने की आजादी होगी। पंजाब की मंडियों का जिक्र करते हुए तोमर ने कहा, पंजाब की मंडियों में विभिन्न जींसों पर 8.5 फीसदी टैक्स है और मंडी में समय पर भुगतान भी नहीं होता था। किसानों को अपने घर से उत्पाद लेकर मंडी आना होता था, जहां उनकी बोली लगती थी। कम बोली लगने पर किसान शाम तक इंतजार करता था और अंत में वापस लाने का खर्च लगने से बचने के लिए वह उसी दाम पर बेचने को मजबूर होता था।

उन्होंने कहा कि अब किसानों की यह मजबूरी खत्म हो गई है, वे अपने घर से भी अपनी फसल बेच सकते हैं और उनको तत्काल उसकी कीमत का भुगतान किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा, राज्य सरकार के मंडी परिसर के बाहर किसी भी स्थान से किसान अपनी उपज बेच सकते हैं। यह अधिकार इस विधेयक के माध्यम से किसानों को मिला है, जिसकी मांग वर्षों से हो रही थी।

उन्होंने कहा कि मंडी के भीतर टैक्स है, जबकि मंडी के बाहर फसलों की खरीद पर कोई टैक्स नहीं है, जिससे किसानों को फसलों का ज्यादा दाम मिलेगा। उन्होंने कहा कि जहां तक एपीएमसी का सवाल है तो राज्य जब तक चाहेगा तब तक एमपीएमसी रहेगा, लेकिन किसानों के पास मंडी के भीतर या बाहर अपनी फसल बेचने की स्वतंत्रता है। यह बात उन्होंने कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020 के संबंध में कही।

कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 से किसानों को होने वाले फायदे गिनाते हुए कृषि मंत्री ने कहा, हमारे देश में 86 फीसदी छोटी जोत वाले किसान हैं और जोत का रकबा लगातार छोटा होता जा रहा है। उनका उत्पादन इतना कम होता है कि वह उसे बेचने के लिए मंडी जाना चाहें तो उसका किराया काफी हो जाता है। उसे एमएसपी का भी फायदा कभी-कभी नहीं मिल पाता है। अगर ये किसान इकट्ठा होकर महंगी फसल लगाने के प्रति आकर्षित होंगे तो उन्हें उनके उत्पादन का अच्छा मूल्य मिलेगा।

तोमर ने कांट्रैक्ट फॉमिर्ंग को किसानों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा, मेरी ²ष्टि में कांट्रैक्ट फॉमिर्ंग नाम गलत है, लेकिन जिसके लिए इसका उपयोग हो रहा है उसका उद्देश्य ठीक है।

उन्होंने इस मसले पर किसानों की आशंका दूर करते हुए कहा कि विधेयक में खेत का कांट्रैक्ट नहीं सिर्फ फसल के कांट्रैक्ट का प्रावधान है। कृषि मंत्री ने विधेयक के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा, खेत का मालिक किसान है और फसल का मालिक किसान। लेकिन किसानों को बुवाई से पहले फसल के मूल्य की गारंटी मिल पाए, इसके लिए वह किसी से करार कर पाए, इस बात का विधेयक में प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि जिस फसल को लेकर करार होगा उसके औसत मूल्य पर करार होगा और इसके माध्यम से किसान अपने जोखिम का हस्तांतरण प्रोसेसर्स पर करेगा, लेकिन जब उस फसल की तैयारी के समय दाम ज्यादा रहेगा किसानों को उसका लाभ मिलेगा। इस बात का जिक्र करार में ही रहेगा।

फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के मसले पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए तोमर ने कहा कि इस विधेयक में एमएसपी का प्रावधान क्यों नहीं, यह बात वही लोग कह रहे हैं जो देश में 50 साल सत्ता में रहे हैं। उन्होंने विपक्ष से सवालिया लहजे में कहा, अगर देश मंे एमएसपी को लेकर कानून की जरूरत थी, तो 50 साल के शासन काल में आपने क्यों नहीं बनाया।

तोमर ने कहा कि इन विधेयक के प्रावधानों का विरोध कोई नहीं कर रहे हैं, बल्कि जो बात इन विधेयकों में नहीं है उसकी बात कर रहे हैं और किसानों को गुमराह कर रहे हैं।

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