सोया मीट नहीं खाने वालों के लिए प्रोटीन का बढिया स्त्रोत -नए अध्ययन में किया जा रहा अब नया दावा

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नई दिल्ली : (ईएमएस)। सोयाबीन सिर्फ टेस्टी इन्ग्रेडिएंट ही नहीं बल्कि जो लोग मीट नहीं खाते उनके लिए प्रोटीन का बढ़िया स्त्रोत है। सोया प्रोटीन सोयाबीन्स से मिलता है और इससे कई तरह के प्रॉडक्ट्स बनाए जाते हैं जैसे, टोफू, सोयमिल्क, सोया नट्स, सोया सॉस वगैरह। यह डेयरी और मीट प्रॉडक्ट के बेस्ट अल्टरनेट के रूप में काम करता है। हालांकि इसे कई लोग आराम से खाते हैं लेकिन कुछ वक्त से इस पर कई स्टडीज हुई हैं जिनसे इसके फायदे और नुकसानों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जहां रेड मीट और दूसरी डायट्स की जगह सोयाबीन के इस्तेमाल से हार्ट डिजीज का खतरा कम होने की बात सामने आई वहीं सोया से हॉर्मोन्स के प्रभावित होने की बातें भी सामने आ रही हैं। यह चर्चा इसलिए शुरू हुआ क्योंकि सोया में आइसोफ्लैवोन्स की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इस कपाउंड में एस्ट्रोजन जैसे गुण होते हैं इसका मतलब है कि यह फीमेल सेक्स हार्मोन एस्ट्रोजन की तरह काम करता है। बता दें कि एस्ट्रोजन कुछ तरह के ब्रेस्ट कैंसर की ग्रोथ को भी बढ़ावा देता है। वैज्ञानिक बीते कई दशकों से इस कंपाउंड के शरीर पर प्रभाव पर रिसर्च कर रहे हैं लेकिन आइसोफ्लैवोन्स अकेले कैंसर रिस्क को बढ़ाते हैं या नहीं यह बात नहीं कही जा सकती क्योंकि इसके साथ कई और भी फैक्टर्स जिम्मेदार देखे गए हैं। वहीं कुछ शोधों में यह भी देखा गया है कि सोया कैंसर रिस्क से बचाता भी है। बता दें कि सोया पर बीते कई दशकों से शोध हो रहे हैं लेकिन कोई एक स्टडी ऐसी नहीं है जो कि पर्फेक्ट हो। फिर भी यह कहा जा सकता है कि सोया कई अनहेल्दी फूड्स को रिप्लेस करता है तो इसके हेल्थ बेनिफिट्स ज्यादा हैं। भारत सहित कई एशियाई देशों में सोया कई सालों से खाया जा रहा है लेकिन कुछ शोधों के बाद इसको खाने को लेकर कुछ कॉन्ट्रोवर्सीज पैदा हो गई हैं। वेगन और जो लोग लैक्टोज के प्रति संवेदनशील होते हैं उनके लिए सोया प्रोटीन नई चीज नहीं है।