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कोरोना मरीज को सरकारी मदद 100 रुपये लेकिन खर्च हो रहे 400

नई दिल्ली। कोरोना से लड़ रहे मरीजों को शासन के साथ एनजीओ का भी सहारा है। यदि एनजीओ मदद न करें तो कोरोना मरीज बीमारी के साथ खाने-पीने के लिए भी जूझते नजर आएंगे। रोजाना करीब 400 रुपये की डाइट पाने वाले कोरोना मरीजों को शासन की तरफ से महज 100 रुपये दिए जा रहे हैं। इसी 100 रुपये में इन्हें चार लीटर बिसलरी पानी के साथ स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन परोसने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य अफसरों की है। कोरोना वायरस की चपेट में आए मरीजों को सुपाच्य भोजन की आवश्यकता होती है। पीने के लिए इन्हें सामान्य पानी की जगह बिसलरी पानी देना होता है। नींबू पानी से लेकर दूध, अंडे, दलिया, खिचड़ी, दाल, हरी सब्जी, दही, सलाद, चावल, नारियल पानी, मिठाई आदि भी खाने में देना होता है। एक मरीज की प्रतिदिन की डाइट कम से कम 400 रुपये तक होती है, लेकिन शासन की तरफ से विभाग को महज 100 रुपये दिए जाते हैं। अफसर बाकी का इंतजाम करने के लिए एनजीओ और समाजसेवियों के भरोसे ही रहते हैं।कोरोना मरीजों को तीन दिन बाद कौन सा एनजीओ या समाजसेवी खाने में मदद करेगा, इसे तीन दिन पहले ही तय कर दिया जाता है। शासन द्वारा जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की प्रतिदिन की डाइट पर भी 100 रुपये ही खर्च किए जाते हैं। गर्भवती महिला और कोरोना मरीज को मिलने वाले खाने में काफी अंतर होता है।

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