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गूगल एआई मॉडल से होगी स्तन कैंसर की पहचान

नई दिल्ली (ईएमएस)। स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं और मैमोग्राफी के दौरान सही पहचान न होने के कारण परेशान स्वस्थ महिलाओं के लिए गूगल का एआई मॉडल उम्मीद की किरण बनकर आया है। आर्टिफिशियल इंटेजिलेंस पर आधारित गूगल के मॉडल ने स्तन कैंसर की पहचान करने में रेडियोलॉजिस्ट को भी पीछे छोड़ दिया है। गूगल एआई सिर्फ एक्स रे परिणामों को स्कैन करके ही स्तन कैंसर की सटीक पहचान कर सकता है। मैमोग्राफ को समझना विशेषज्ञों के लिए भी एक मुश्किल काम है। इससे स्तन कैंसर का परीक्षण गलत पॉजिटिव और नेगेटिव परिणाम दे सकता है। इन खामियों और गलतियों के कारण स्तन कैंसर की पहचान करने और इलाज करने में देर हो सकती है। गूगल ने कहा कि उनका एआई न सिर्फ मरीजों की परेशानी को कम करेगा, बल्कि रेडियोलॉजिस्ट के दबाव को भी कम करने में मदद करेगा। सबसे आम परीक्षण है डिजिटल मैमोग्राफी डिजिटल मैमोग्राफी और एक्स-रे इमेजिंग स्तन कैंसर की पहचान के लिए किए गए सबसे आम परीक्षण हैं। अमेरिका और यूके में हर साल तकरीबन 4.2 करोड़ लोग डिजिटल मैमोग्राफी और एक्स रे इमेजिंग करवाते हैं।

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