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जीडीए बोर्ड सदस्य चुनाव में सपा ने दिये बसपा से गठबंधन के संकेत

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। जीडीए बोर्ड चुनाव में एकतरफ जहां भाजपा अपने दो उम्मीदवारों को वोटों के गणित के लिहाज से जीतने को लेकर आश्वस्त है। वहीं भाजपा तीसरे उम्मीदवार के लिये सात वोटों के साथ दूसरे दलों में तोड़फोड़ की रणनीति अपना सकती है। भाजपा के रथ को रोकने के लिये सपा बसपा गठबंधन के संकेत मिल रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि साइकिल और हाथी की फूलपुर वाली दोस्ती यहां भाजपा को झटका देते हुए अपने एक उम्मीदवार को जीडीए बोर्ड में सदस्य के रूप में भेज सकती है। सूत्र बता रहे हैं कि जीडीए बोर्ड चुनाव में सपा बसपा गठबंधन का उम्मीदवार ताल ठोंकेगा। सपा के पास भले ही पांच वोट है लेकिन वह यहां हाथी को सपोर्ट कर सकती है। गठबंधन के गेम में बसपा के हाथी का पलड़ा भारी है। बसपा के पास 13 पार्षद हैं और उसके पास एमएलसी के रूप में प्रदीप जाटव और सुरेश कश्यप के वोट हैं। यदि बसपा के उम्मीदवार को यहां सपा का साथ मिल गया तो बसपा का उम्मीदवार चुनाव जीतने की स्थिति में आ जायेगा। सपा के पास पांच वोट के अलावा एमएलसी राकेश यादव, एमएलसी आशु मलिक,एमएलसी बलवंत सिहं रामूवालिया ,एमएलसी जितेंद्र यादव के वोट हैं। ऐसे में बसपा अपने 15 वोटों के साथ जब सपा के 9 वोट लेगी तो उसके पास 24 वोट होंगे और उसे जीतने के लिये महज एक वोट का जुगाड़ करना है। सपा का इस चुनाव में क्या रोल रहेगा, के सवाल पर जब करंट क्राइम ने सपा के महानगर अध्यक्ष राहुल चौधरी से बात की तो उन्होंने कहा कि सपा जीडीए बोर्ड मेंबर चुनाव में मैदान में है। गठबंधन के सवाल पर भी उन्होंने संकेत दिये कि जब यूपी में बसपा और सपा के बीच गठबंधन चल ही रहा है तो फिर निगम या जीडीए बोर्ड चुनाव भी इसी का हिस्सा हैं। उन्होंने संकेत दिये कि जीडीए बोर्ड चुनाव में गठब्ंधन हो सकता है। अब यदि गठबंधन होता है तो वोटों की गठरी के हिसाब से यहां बसपा का पलड़ा भारी है और माना जा रहा है कि बसपा का उम्मीदवार मैदान में आयेगा और सपा उसे सपोर्ट करेगी। वहीं जब गठबंधन को लेकर करंट क्राइम ने बसपा के जिलाध्यक्ष विनोद प्रधान से बात की तो उन्होंने भी गठबंधन के संकेत दिये। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर जो भी तय होना है उसे आज तय कर लिया जायेगा। विनोद प्रधान ने कहा कि बसपा जीडीए बोर्ड चुनाव में जीतेगी।
कांग्रेस के साथ होगी उहापोह की स्थिति
निगम के सदन में कांग्रेस के पास 16 पार्षद हैं और फिलहाल गठबंधन के सीन में उसका रोल नजर नहीं आ रहा है। सपा अपने वोट बसपा को तो गठबंधन के तहत दे सकती है लेकिन कांग्रेस के नाम पर सपा के खेमे में खामोशी है। कांग्रेस को गठबंधन का हाथ थामना ही होगा वरना उसके सामने सिर्फ तमाशा देखने के अलावा कोई विकल्प फिलहाल नहीं दिख रहा है। सपा बसपा गठबंधन को सिर्फ एक वोट चाहिये और कांग्रेस को 9 वोट चाहिये। तभी वह अपने उम्मीदवार को जीडीए बोर्ड में जिता सकती है। यदि कांग्र्रेस को गठबंधन का हिस्सा बनकर लोकसभा चुनाव लड़ना है तो उसे यहां गठबंधन का साथ देना होगा। सूत्र ये भी बता रहे हैं कि कांग्रेस के खेमे में क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है। यदि कांग्रेस अपना एक उम्मीदवार जिताना चाहती है तो उसे सपा बसपा गठबंधन का हिस्सा बनने के साथ निर्दलीय वोटों पर भी फोकस करना होगा। यहां कांग्रेस के लिये चुनौती ये है कि यदि भाजपा ने अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिये इन वोटों पर फोकस किया और उसके पार्षदों पर डोरे डाले तो फिर उसके सामने चुनौती अपने वोटों को सहेजने की भी होगी। भाजपा पहले भी कांग्रेस के पार्षदों को भाजपाई बना चुकी है। पूर्व पार्षद प्रवीण चौधरी और पार्षद राजेंद्र तितौरिया पहले कांग्रेस के टिकट पर ही चुनाव जीत कर पार्षद बने थे और बाद में वो भाजपा में पार्षद रहते हुए ही चले गये थे।

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