हल्दी की ताकत को विदेशी भी स्वीकार रहे

0
57

नई दिल्ली (ईएमएस)। देशी एंटीबायोटिक दवा हल्दी की ताकत को अब विदेशी विशेषज्ञों ने भी स्वीकार कर लिया है कि दर्द में हल्दी पैरासिटामल और आईबूप्रोफेन से ज्यादा लाभदायक होती है। इन दवाओं के दुष्प्रभाव हैं, लेकिन हल्दी का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है। मिलान स्थित एक प्रमुख दवा निर्माता कंपनी के शोध में पता चला है कि खेल के दौरान लगने वाली चोट या मोच के दर्द में हल्दी दर्द निवारक दवाओं जितनी ही कारगर है। खास बात यह है कि इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है। शोध के दौरान रग्बी के चोटिल खिलाड़ियों को हल्दी दी गई, जिससे उन्हें पैरासिटामोल या आईबूप्रोफेन जितनी राहत मिली। शोध के दौरान देखा गया जिन लोगों ने राहत पाने के लिए पारंपरिक दर्द निवारक दवाओं का सेवन किया उन्हें गैस्ट्रो संबंधी समस्याओं से भी जूझना पड़ा। प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर फ्रांसेस्को डी पेरो ने कहा कि इस शोध से पता चलता है कि हल्दी में पाए जाने वाले तत्व करक्यूमिन से तैयार उत्पाद हड्डी और मांसपेशियों से संबंधित दर्द में सुरक्षित दर्द निवारक हो सकते हैं। पूर्व में हुए शोध में करक्यूमिन का सकारात्मक प्रभाव गठिया के मरीजों में देखा जा चुका है। इसके अलावा यह कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियों में भी अधिक कारगर है।
शोधकर्ता 50 रग्बी खिलाड़ियों के अनुभवों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। इन्हें हड्डियों और मांसपेशियों में तकलीफ थी। इन्हें एक ग्राम करक्यूमिन तत्व वाली एल्गोकर टैबलेट 10 दिनों तक दिन में दो बार दी गई। प्रत्येक 20 दिनों में इनकी स्थिति का परीक्षण किया गया। यह शोध यूरोपियन रिव्यू फॉर मेडिकल एंड फारमाकोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित हुआ है। डॉ. डी पेरो ने कहा कि अध्ययन में देखा गया कि एल्गोकर टैब्लेट लेने वाले ज्यादातर मरीजों को राहत मिली। पारंपरिक दर्द निवारक लेने वाले 16 फीसदी मरीजों में गैस्ट्रिक समस्याएं देखने को मिलीं। यूनीवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में हुए शोध में पता चला है कि हल्दी का सेवन याद्दाश्त 30 फीसदी तक बढ़ जाती है। इसके साथ ही अवसाद में भी यह राहत पहुंचाती है। हल्दी में मौजूद तत्व करक्यूमिन मस्तिष्क के उन हिस्सों में प्रोटीन जमा नहीं होने देता है, जो याद्दाश्त और भावनाओं को देखते हैं। हल्दी का पीला रंग करक्यूमिन तत्व के कारण होता है।
समझा जाता है कि यह तत्व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के साथ ही याद्दाश्त भी दुरुस्त करता है। इसमें इनफ्लेमेशन यानी जलन, सूजन या उत्तेजना को कम करने की क्षमता होती है। इनफ्लेमेशन का संबंध पूर्व के शोधों में डिमेंशिया और गंभीर अवसाद से साबित हो चुका है। एक अन्य शोध में विशेषज्ञों का दावा है कि हल्दी में मौजूद तत्व करक्यूमिन से बुजुर्गों में होने वाली हड्डियों के क्षरण की समस्या ऑस्टियोपोरोसिस में भी राहत मिलती है। पिछले साल जेनोआ यूनीवर्सिटी में हुए शोध में देखा गया कि हल्दी का सेवन करने वाले बुजुर्गों की हड्डियों की सेहत में सुधार हुआ। हल्दी वाले पूरक आहार लेने वाले बुजुर्गों की हड्डियों की सेहत छह माह में सात फीसदी तक बेहतर हुई।यहां बता दें कि हमारे देश भारत में चोट-मोच के देसी इलाज के रूप में हल्दी का इस्तेमाल सैकडों सालों से हो रहा है, अब यही बात विदेशियों के दिमाग में भी आ रही है। हल्दी का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं और सौदर्य प्रसाधन सामग्री के निर्माण में भी हो रहा है।