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पशुओं के लिए मुंबई में खुलेगा पहला मल्टी स्पेशियालिटी हास्पिटल -जानवरों के लिए भी एमआरआई सुविधा उपलब्ध होगी

मुंबई (ईएमएस)। मुंबई में जल्दी ही पशुओं का पहला मल्टी स्पेशियालिटी अस्पताल शुरू होने वाला है। इस अस्पताल में प्रसूति, सर्जरी, मेडिसिन जैसे 25 विभाग होंगे। यह अपनी तरह का पहला हास्पिटल होगा, जहां एक ही छत के नीचे सभी तरह के उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही अस्पताल में 300 जानवरों को भर्ती किए जाने की भी सुविधा भी होगी। महालक्ष्मी में बनने वाले इस अस्पताल के लिए शुक्रवार को बीएमसी और टाटा ट्रस्ट के बीच करार किया गया। बीएमसी के अनुसार, यह जानवरों का पहला मल्टी स्पेशिऐलिटी अस्पताल होगा, जहां एक ही छत के नीचे उन्हें हर तरह का इलाज उपलब्ध होगा। जानवरों की बीमारी का पता लगाने के लिए एमआरआई की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। डॉक्टरों के अनुसार, कई बार दुर्घटना का शिकार होने के बाद जानवरों, खासकर कुत्तों की एमआरआई की जरूरत पड़ती है। अब तक शहर में इसकी व्यवस्था नहीं होने के कारण कई मामलों में इलाज काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जानवरों के लिए एमआरआई की व्यवस्था आने वाले दिनों में इनके इलाज में काफी मददगार साबित हो सकती है। देवनार पशुवध गृह के जीएम डॉ. योगेश शेट्टे ने बताया कि यह देश का पहला अस्पताल होगा, जहां जानवरों के इलाज के लिए अत्याधुनिक सुविधा मिलेगी। पालतू जानवरों के सीटी स्कैन, सोनॉग्रफी, एमआरआई सहित कई तरह के जांच के लिए पशु प्रेमियों को अब इधर-उधर भटकना नहीं होगा। अगले छह महीनों में बिल्डिंग का काम शुरू हो जाएगा।
शेट्टे ने बताया कि गली या सड़कों पर आवारा घूमते जानवरों को यहां मुफ्त इलाज दिया जाएगा। बीपीएल कार्ड धारक मालिकों के जानवरों को इलाज में रियायत मिलेगी। परेल स्थित जानवरों के अस्पताल के प्रमुख डॉ. जे.सी. खन्ना ने कहा कि इस अस्पताल के शुरू होने के बाद हजारों जानवरों को राहत मिलेगी। बता दें कि फिलहाल परेल स्थित जानवरों का अस्पताल मुंबई का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र है, लेकिन यहां भी ज्यादा से ज्यादा 200 जानवर ही भर्ती किए जा सकते हैं।
जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था ‘ओह माई डॉग’ के संस्थापक संकल्प शर्मा ने कहा कि मुंबई जैसे शहर में जानवरों के बड़े अस्पताल की बहुत जरूरत है। दूसरे शहरों की तुलना में यहां जानवरों को पालने का चलन काफी ज्यादा है। मुंबई में आवारा कुत्ते भी बहुत हैं। अस्पतालों और जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण कई बार बीमार और दुर्घटना का शिकार होने वाले जानवरों को समुचित उपचार नहीं मिल पाता।

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