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यूपी में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से हो रहा सैनिटाइजेशन

 

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यूपी सरकार द्वारा सैनिटाइजेशन के अभियान में अब फायर सर्विस महकमा भी अहम भूमिका निभाने लगा है। इस महकमें की 900 से अधिक छोटी बड़ी गाडियां सूबे के हर जिले में चिन्हित किए गए संवेदनशील स्थलों, हाट स्पाट तथा बड़े बाजार और आवासीय स्थलों का सैनिटाइजेशन में जुटी हैं। इसके अलावा फायरकर्मी गांव देहात में लगने वाली आग को बुझाने में भी जुटे हैं। सैनिटाइजेशन के कार्य में लगी फायर ब्रिगेड की इन गाड़ियों से बीते 24 घंटों में लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी सहित सूबे के दस जिलों में 1883 स्थलों का सैनिटाइज किया गया हैं। यह अभियान अब लगातार जारी रहेगा।
सैनिटाइजेशन के इस अभियान पर डीजीपी मुख्यालय में एडीजी/आईजी फायर सर्विस विजय प्रकाश लगातार नजर रख रहे हैं। इस अभियान के तहत फायर कर्मियों को किसी व्यक्ति के ऊपर और किसी घर या बिल्डिंग की भीतर छिड़काव ना करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी वजह सैनिटाइजेशन में उपयोग होने वाला ‘सोडियम हाइपोक्लोराइड’ मोडीफाइड साल्ट है। जैसे ही यह साल्ट किसी सतह या पानी के संपर्क आता है तो क्लोरीन रिलीज कर देता है और सोडियम हाइड्रॉक्साइड में तब्दील हो जाता है। सोडियम हाइड्रॉक्साइड एक बहुत मजबूत बेस होता है जो किसी बैक्टीरिया या वायरस को पनपने नहीं देता है। वहीं वातावरण में रिलीज हुई क्लोरीन हवा में मौजूद कीड़े, मच्छर, बैक्टीरिया और वायरस को मारता है। ‘सोडियम हाइपोक्लोराइड’ का अधिक सांद्रता में उपयोग किया जाए तो यह साल्ट नुकसान भी पहुंचाता है। इसी वजह से फायरकर्मियों को यह निर्देश दिया गया है कि किसी व्यक्ति या जानवर के ऊपर इसका छिड़काव ना किया जाए।
एडीजी- आईजी फायर विजय प्रकाश के अनुसार, फायर ब्रिगेड से आग बुझाने के लिए अभी तक दो तकनीक का उपयोग किया जा रहा था। पहली सामान्य आग लगने पर जेट मशीन से पानी की तेज धार आग पर डाली जाती है। दूसरी तकनीकी इलेक्ट्रिकल आग को बुझाने की थी। पहले बिजली से लगने वाली इलेक्ट्रिकल आग को बुझाने के लिए कैल्शियम कार्बोनेट या पाउडर का उपयोग किया जाता था, क्योंकि पानी का उपयोग करने से करंट लगने का खतरा होता था। बाद में यह कान्सेप्ट आया कि पानी से भी इलेक्ट्रिकल आग को बुझाया जा सकता है, अगर आग को पानी से ‘एटमाइज’ कर दिया जाए। ‘एटमाइजर’ वह तकनीक है जिसमें बहुत हाइप्रेशर से पानी को छोटे नोजल से गुजारने पर यह पानी को बहुत छोटी-छोटी बूंदों में बदलकर बाहर स्प्रे करता है। यह इलेक्ट्रिकल आग के इदगिर्द एक कुहासा जैसा बना देता है और कुछ ही देर आग बुझ जाती है। इस ‘एटमाइजर’ तकनीक से इलेक्ट्रिकल आग बुझाने पर करंट लगने का खतरा नहीं होता है। सूबे में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां इलेक्ट्रिकल आग बुझाने के लिए इसी ‘एटमाइजर’ तकनीकी का उपयोग कर रही थीं। बीते वर्ष भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में एटमाइजर लगाकर इनसे सैनिटाइजेशन का कार्य किया गया था। अब फिर लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, आगरा, गौतमबुद्धनगर, मथुरा, मेरठ, फिरोजाबाद और गाजियाबाद में ‘एटमाइजर’ लगी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से सेनिटाइजेशन किया जा रहा है।
इस सैनिटाइजेशन की मानीटरिंग जनपद स्तर के साथ ही प्रदेश स्तर पर भी की जा रही है। इस मानीटरिंग के तहत लखनऊ में 359, प्रयागराज में 78, कानपुरनगर में 66, वाराणसी में 237, आगरा में 85, गौतमबुद्धनगर में 483, मथुरा में 95, मेरठ में 146, फिरोजाबाद में 201 और गाजियाबाद में 133 स्थलों को रोज सैनिटाइजेशन रोज किया जा रहा है। इसी प्रकार अन्य जिलों में चिन्हित गए हाटस्पाट/संभावित हाटस्पाट, संवेदनशील स्थल, बाजार स्थल, आवासीय स्थल और अन्य स्थलों पर सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में फायर ब्रिगेड की 850 पुरानी और 65 नई गाड़ियां सैनिटाइजेशन के काम में लगी हैं। इनमें कई गाड़ियों के किनारों पर भी एटमाइजर स्प्रे लगा दिया गया है, जिससे जब यह चलती हैं तो अगल-बगल का इलाका सैनिटाइजेशन होता रहता है। लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, आगरा, गौतमबुद्धनगर, मथुरा, मेरठ, फिरोजाबाद और गाजियाबाद में ‘एटमाइजर’ लगी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से सैनिटाइजेशन हो रहा है। जिसके तहत रेलवे एवं बस स्टेशन, अस्पतालों के समीप, शहर के बड़े बाजार तथा सभी सरकारी कार्यालयों एवं न्यायालय परिसर और सब्जी मंडी आदि इत्यादि स्थलों का रोज सैनिटाइजेशन किया जा रहा है।

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