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जम्मू-कश्मीर राज्य

श्रीनगर लोगों में डर, राशन-पानी के लिए लगीं लाइनें

श्रीनगर (ईएमएस)। घाटी में अमरनाथ यात्रियों तथा पर्यटकों को जल्द से जल्द लौट जाने की एडवाइजरी जारी करने के बाद अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। कश्मीर के साथ ही जम्मू संभाग के पुंछ, राजोरी, डोडा, किश्तवाड़, रामबन आदि जिलों में अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। लोगों में किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी। रोजमर्रा की जरूरत के सामान के साथ ही राशन की खरीदारी शुरू हो गई। पेट्रोल पंपों पर भी लोगों की लंबी कतारें लगीं। श्रीनगर में कई पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल खत्म हो गया। वहां केवल डीजल का स्टाक था। एटीएम पर भी लंबी लाइनें देखीं गईं। मेडिकल शॉप पर लोग जरूरत की दवाइयां खरीदते देखे गए। इसके साथ ही किरयाना और सब्जी की दुकानों पर भी भीड़ रहीं। इस बीच अफवाहों का दौर जारी रहा। कभी 35ए को हटाने की अफवाह सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो कभी ज मू को अलग राज्य बनाने और कश्मीर एवं लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की अफवाह। यह अफवाह भी फैली कि राज्य पुलिस के जवानों को हथियार जमा करने को कहा गया है। उनकी जगह सीआरपीएफ कर्मियों की तैनाती की जाएगी। आधी रात के बाद यह अफवाह भी तैरने लगी कि केंद्रीय रक्षा मंत्री रात में ही कश्मीर पहुंचने वाले हैं। अफवाहों के बीच श्रीनगर समेत पूरी घाटी में सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी रही। नाके पर चेकिंग चलती रही। सुरक्षा बलों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई ताकि अफवाहों का अराजक तत्व फायदा न उठाने पाएं।

सीआरपीएफ जवानों की छुट्टियों में कटौती
सीआरपीएफ ने घाटी में जवानों की छुट्टियों में कटौती कर दी है। सूत्रों का कहना है कि किसी को भी अब छुट्टियां नहीं मिलेगी। जो छुट्टी पर हैं उन्हें वापस बुलाया जा सकता है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कश्मीर में हलचल के मायने
पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में बैचेनी है। यह बेचैनी घाटी तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में दिल्ली का राजनीतिक गलियारा भी है। शुक्रवार को अमरनाथ यात्रा रोकने के फैसले के बाद से लगता है, कुछ बड़ा होने वाला है कश्मीर में…वाली बात फिजाओं में है। घाटी में 35 हजार जवानों की तैनाती और सरकार की एडवाइजरी के बाद घाटी में जिस तरह का माहौल बदला है, वह कई संभावनाओं की तरफ इशारा कर रहा है। उसके बीच सवाल यह भी है कि कश्मीर में बाहरी ताकतों से खतरा है या फिर यह भीतर की चुनौतियों से ही निपटने की तैयारी है।

35ए पर अभी नहीं तो कभी नहीं?
धारा 35ए पर मोदी सरकार को लगता है कि यह सबसे मुफीद वक्त है जब वह कड़ा स्टैंड दिखा सकती है। अगले हफ्ते एक याचिका पर सुनवाई हो सकती है, जिसमें इस धारा की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कह सकती है कि उसे इस धारा को हटाने से आपत्ति नहीं है। यह धारा 370 के मूल अवधारणा में नहीं थी। मालूम हो कि धारा 35 ए के तहत जम्मू-कश्मीर में वहां के मूल निवासी के अलावा देश के किसी दूसरे हिस्से का नागरिक कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता। इससे वह वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता है। 1954 में इस धारा को धारा 370 के तहत दिए गए अधिकारों के तहत ही जोड़ा गया था।

तीन तलाक से बढ़ी हिम्मत
धारा 370 हटाना बीजेपी के राजनीतिक अजेंडे में है। अगर सरकार इस पर निर्णायक फैसला लेती है, तो इसे संसद से भी मंजूरी लेनी होगी। तीन तलाक और आरटीआई कानून जैसे बिल पर राज्यसभा में विपक्ष को पटकनी देने के बाद बीजेपी को लगता है कि वह इस मुद्दे पर अब बढ़ सकती है। साथ ही राजनीतिक रूप से भी इसका विरोध करना अब आसान नहीं होगा। हालांकि बीजेपी की सहयोगी जेडीयू और अकाली दल इस बात की विरोधी रही है। इसके अलावा परिसीमन आयोग को लेकर भी चर्चा गर्म है, जिसके बाद बीजेपी की मंशा है कि वहां आबादी के हिसाब से नए सिरे से विधानसभा सीटें तय हो। इससे जम्मू की सीटें अधिक हो जाएगी और वहां हिंदू सीएम बनाने का रास्ता साफ हो सकता है।

विधानसभा चुनाव की चर्चा भी गर्म
मोदी सरकार ने तत्काल कश्मीर पर किसी बड़े फैसले की संभावना को खारिज करते हुए मौजूदा घटनाक्रम को वहां से मिली खुफिया रिपोर्ट और चुनाव की तैयारी से जोड़ रही है। तय कार्यक्रम के अनुसार राज्य में अक्टूबर-नवंबर में बर्फ गिरने से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के लिए वहां बहुत बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की जरूरत होगी। सुरक्षा कारणों से ही वहां एक लोकसभा सीट पर दो चरणों में चुनाव कराने पड़े थे। सरकार वहां लोगों की भागीदरी से कामयाबी से चुनाव कराके अलगाववादी ताकतों को करारा जवाब देना चाहती है।

अब तक क्या
27 जुलाई: 10,000 से ज्यादा जवानों को जम्मू-कश्मीर में तैनात कर दिया गया।
28 जुलाई: पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर पर फोकस किया। उन्होंने कहा, विकास की मदद से बंदूक और बमों पर विजय पाई जा सकती है।
30 जुलाई: दिल्ली में जम्मू-कश्मीर बीजेपी इकाई के कोर ग्रुप की अहम बैठक हुई। विधानसभा चुनाव इसी साल कराने के संकेत दिए गए।

घाटी में हैं करीब 115 विदेशी आतंकी
सूत्रों के मुताबिक इस वक्त घाटी में करीब 270-275 आतंकी सक्रिय हैं। इनमें से 115 विदेशी आतंकी हैं और करीब 162 लोकल आतंकी। इंटेलिजेंस सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से करीब 200 आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं। आतंकियों के 14 से 16 लॉन्च पैड हैं जिनसे आतंकी घुसने की कोशिश कर सकते हैं। दो दिन पहले ही आर्मी ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया है। तीन दिन पहले जब पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर वायलेशन में एकदम तेजी आई उस वक्त घुसपैठ की कोशिश की गई थी। जब भी आतंकी घुसपैठ की कोशिश करती है तो पाकिस्तान की सेना उन्हें कवर फायर देती है।

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