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निष्कासित पूर्व विधायक गगन भगत ने भाजपा नेताओं से मांगी क्षमा

जम्मू (ईएमएस)। भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित पूर्व विधायक डा. गगन भगत पार्टी नेताओं पर लगाए गए राजनीतिक भ्रष्टाचार के आरोपों पर आज भी पूरी तरह अडिग हैं। लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणियों के लिए इन नेकाओं से क्षमा मांगी है। डा. गगन भगत नेशनल कांफ्रैंस में शामिल हो गए हैं। एक बातचीत में डा. गगन भगत का कहना था कि चरित्र हनन संबंधी कुछ आरोपों पर भाजपा नेताओं ने उन्हें मानहानि का नोटिस भिजवाया है, हालांकि अभी तक उन्हें वह नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन इस संबंध में वह इतना कहना चाहते हैं कि उनके क्षेत्र आरएसपुरा की संस्कृति पंजाब से बहुत मेल खाती है। ऐसे में कई बार गुस्से में अथवा आम बोलचाल में कुछ ऐसे आपत्तिजनक शब्द निकल जाते हैं। ऐसे शब्दों एवं जुमलों से यदि भाजपा नेताओं को ठेस पहुंची है तो वह इन टिप्पणियों को वापिस लेते हुए माफी मांगने के लिए तैयार हैं।
डॉ. भगत ने स्पष्ट किया कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ भाजपा नेताओं पर लगाए गए राजनीतिक भ्रष्टाचार किए जाने संबंधी आरोपों पर अडिग हैं। उन्होंने दोहराया कि यदि पार्टी फंड में 10 लाख रुपए जमा करवाने संबंधी आरोप रिकार्ड पर है। उन्होंने कहा कि पार्टी को इसका कारण भी बताना चाहिए कि क्यों उसने किसी नेता को रातोंरात पहले विधायक मनोनीत किया, फिर मंत्री बनाकर डबल प्रोमोशन दे दी, जबकि पार्टी में दशकों से काम करने वाले कार्यकर्ता अभी तक वंचित हैं।
व्यक्तिगत हमलों के सवाल पर पूर्व विधायक ने कहा कि इसकी शुरुआत भी भाजपा के कुछ नेताओं ने ही की और उन्हें इसका शिकार बनाया गया। भाजपा में उनके विरोधी नेताओं को जब राजनीतिक क्षेत्र में उनके खिलाफ कुछ आपत्तिजनक नहीं मिला तो उन्होंने उनके पारिवारिक मसले को विवाद बनाकर सार्वजनिक कर दिया। उन्होंने इसकी शिकायत पार्टी में हर स्तर के मंच पर की, लेकिन इंसाफ देने के बजाय उन्हें ही प्रताडि़त किया गया। हालांकि भगवान की कृपा से उनका पारिवारिक मसला भी अब ठीक हो गया है और इन नेताओं को मुंह की खानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि उन्हें आरएस पुरा की जनता पर विश्वास है कि वह भविष्य में भी उनका साथ देगी।
पूर्व विधायक डॉ. गगन भगत ने कहा कि आरएस पुरा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के कारण उन्हें टिकट देना भाजपा की संवैधानिक मजबूरी थी। फिर एजेंसियों की रिपोर्टों के आधार पर जीत की संभावना होने के कारण उन्हीं हो टिकट के लिए चुना गया। जहां तक दूसरे दलित नेताओं को टिकट देने का सवाल है तो भाजपा ने आरक्षित सीटों के अलावा किसी भी क्षेत्र में दलित नेताओं को टिकट नहीं दिया। क्यों अनारक्षित नेताओं में दलित नेता काबिल नहीं हैं। सच्चाई तो यह है कि भाजपा को दलितों के वोट तो चाहिए, लेकिन उन्हें उचित सम्मान देना नहीं आता।
पूर्व विधायक भगत ने कहा कि आज राजनीति बदल रही है और राज्य में भी जम्मू-कश्मीर-लद्दाख तीनों खित्तों को जोडऩे वाली पार्टी की आवश्यकता है, तीनों खित्तों में जनाधार, स्वीकार्यता एवं स्पष्ट विचारधारा होने के कारण यह काम केवल नेशनल कांफ्रैंस कर सकती है। नेशनल कांफ्रैंस अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला के आपत्तिजनक बयानों के सवाल पर डॉ. भगत ने कहा कि डॉ. अब्दुल्ला की देशभक्ति को लेकर सवाल खड़े करना न्यायोचित नहीं है। सच्चाई तो यह है कि वह उतने ही सच्चे हिन्दुस्तानी हैं, जितने मोदी जी हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं के हित धारा 370 और 35-ए बचाने में ही सुरक्षित हैं, क्योंकि विशेष दर्जा हटने के बाद राज्य का युवा वर्ग बाहरी प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर पाएगा।

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