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सबने देखा था उन्हें व्हाईट कुर्ते में आते हुए लेकिन कुर्ता हो गया कैसे ग्रीन

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कई बार चीजें संयोग से हो जाती हैं, कई बार चीजें इत्तेफाक से हो जाती हैं और इनका योग ऐसा बनता है कि ये चीजें अपने आप में एक मुस्कान समेटे यादगार हो जाती हैं। हिन्दी भवन में रविवार को कविसम्मेलन का आयोजन था। हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में एक चेहरा वो था जो हर साल 7 समुन्दर पार से केवल इसी कार्यक्रम के लिए आता है।
हिन्दी भवन के संस्थापक रहे स्वर्गीय हर प्रसाद शास्त्री के पुत्र जितेन्द्र शर्मा हर साल अमेरिका से गाजियाबाद इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आते हैं। हिन्दी की इस अलख को जगाने के लिए शहर की एक सांस्कृतिक पहचान बनाने के लिए ललित जायसवाल और सुभाष गर्ग सतत प्रयासरत रहते हैं। नाटक से लेकर साहित्य सम्मेलन और कवि सम्मेलन आयोजित कराते हैं। हिन्दी भवन से ये एक पहचान है और ये दोनों ही व्यक्तिव सांस्कृतिक शान हैं। अब जब हरप्रसाद शास्त्री के पुत्र जितेन्द्र शर्मा अमेरिका से हिन्दी भवन में आयोजित होने वाले काव्य सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे तो यहां सुभाष गर्ग के साथ बैठे। 15 अक्टूबर को भव्य कार्यक्रम होना है और हिन्दी सम्मेलन की तैयारी को लेकर दोनों के बीच गुफ्तगू चल रही थी।
सुभाष गर्ग सफेद कलफदार कुर्ते में थे और उनका कुर्ता कब अमेरिका वाले जितेन्द्र शर्मा की पकड़ में आ गया पता ही नहीं चला। अचानक एक मेहमान की एंट्री हुई और सुभाष गर्ग उठे तो कुर्ता जितेन्द्र शर्मा के पास रह गया। जब तक कोई कुछ समझता तब तक कुर्ता फट गया। अब फटे कुर्ते का राज जब तक कोई समझ पाता तब तक तो सुभाष गर्ग ने घर पर फोन कर दूसरा कुर्ता मंगा लिया। हालाकि अमेरिका से आये शर्मा जी ने कहा कि इतना भी नहीं फटा लेकिन अचानक सीन तब घटा जब सुभाष गर्ग का कुर्ता व्हाईट से ग्रीन हो गया। तब लोगों को जाकर पता चला कि ये कोई कलर मैजिक नहीं है बल्कि कुर्ता फटने का सीन हो गया। करंट क्राइम इस पूरी घटना का चश्मदीद हो गया।

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