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हर देश को धार्मिक उग्रवाद और आतंकवाद पर प्रहार करने का अधिकार

बीजिंग | हाल में एक विदेशी नेटीजन फ्रान्सिस्का ने चीन के सीजीटीएन में प्रसारित शिनच्यांग में आतंकवाद विरोधी स्मृति नामक डॉक्यूमेंट्री फिल्म देखने के बाद लिखा, हर देश को धार्मिक उग्रवाद और आतंकवाद पर प्रहार करने का अधिकार है। इस नेटीजन ने एक बुनियादी कारण बताया, यानी कि आतंकवाद विरोधी काम के लिए रोकथाम सबसे महत्वपूर्ण है। जबकि आर्थिक विकास और जन-जीवन के सुधार से ही आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जा सकता है। जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की नजर में ये सब विकृत हैं। हाल में पोम्पिओ ने चीन के शिनच्यांग में चीन के आतंकवाद विरोधी कार्य को बदनाम किया और खुलेआम चीन के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी की, जिससे उनके शिनच्यांग की समृद्धि व स्थिरता को बर्बाद करने और चीन के विकास से रोकने की साजिश दिखती है। जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की व्यापक सहमति है कि शिनच्यांग संबंधी समस्या अमेरिकी नागरिकों द्वारा रची गयी मानवाधिकार और धार्मिक समस्या बिलकुल नहीं है, बल्कि आतंकवादी और अलगाववादी समस्या है। जड़ से आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद को खत्म करने के लिए चीन सरकार ने शिक्षा पर जोर देकर रोजगार के मौकों को लोगों को देने की कोशिश की। तथ्यों से साबित हुआ है कि अल्पसंख्यक जातियों को रोजगार देने में मदद करना शिनच्यांग में स्थिर विकास करने, जातीय एकता को सुनिश्चित करने का प्रबल कदम है। हाल में शिनच्यांग इतिहास के सबसे अच्छे काल में रहा है। शिनच्यांग में क्रमश: 40 से अधिक महीनों में कोई हिंसक कार्रवाई नहीं हुई है। शिनच्यांग की विभिन्न जातियों के लोग अनार के बीज की तरह एकजुट रहते हैं। शिनच्यांग में समाज शांत रहा है। 2019 में शिनच्यांग की जीडीपी देश के औसत स्तर से भी ऊंची रही, जो 6.2 प्रतिशत तक पहुंची थी। हाल में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 44वीं बैठक में 46 देशों ने बहुमत से फिर एक बार चीन की शिनच्यांग नीति का समर्थन किया। अब तक 91 देशों के 1000 से अधिक लोगों को शिनच्यांग का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया गया है। उन का मानना है कि चीन में आतंकवाद विरोधी कार्य के अनुभव सीखने योग्य हैं। हाल में अमेरिका में महामारी की बहुत गंभीर स्थिति है। नस्लवादी भेदभाव के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं। पोम्पेओ जैसे अमेरिकी राजनीतिज्ञ आत्मा लोचना न कर जानबूझकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अफवाह फैलाते रहे हैं। उनके ऐसे कदमों से अमेरिका की कठिन स्थिति और गंभीर होगी और खुद को नुकसान पहुंचेगा।

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