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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर देश विचार सम्पादकीय

हर नागरिक करें पूर्ण सहयोग

राष्ट के प्रति प्रत्येक नागरिक का एक कर्तव्य होता है। इसी लिए कहा भी जाता है कि जिस धरा पर हमने जन्म लिया है उस धरा की माटी का कर्ज हमें चुकाना चाहिए। हमें बताया भी यही गया है कि देश से बड़ा कुछ नहीं होता। क्योंकि देश होता है तो समाज होता है। देश होता है तो धर्म होता है और देश होता है तो संस्कृति होती है। भारत विविधताओं वाला देश है। आज हमारे देश पर एक बड़ी आपदा आई है। कोरोना महामारी से पूरा विश्व पीड़ित है और ऐसे में एक बड़ी आबादी वाले देश में महामारी का आना बहुत बड़ा संकट है। केंद्र की सरकार और राज्य सरकारें एकजुट होकर इस संकट से जूझ रही हैं। कोरोना के चलते पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया गया है और आर्थिक व सामाजिक गतिविधियां पूरी तरह रुक गई हैं। लॉकडाउन भी जरूरी है और सरकारी मदद भी जरूरी है। सरकार के सामने देश के नागरिकों को बचाने की एक बड़ी चुनौती है। यदि उसने लॉकडाउन का पालन कठोरता से नहीं कराया तो लाखों जिंदगी खतरे में पड़ जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ सरकार के सामने बड़ी चुनौती उस वर्ग को भूख से बचाने की है जो रोजाना कमाता और खाता है। फुटपाथ पर जिंदगी बिताने वाले वर्ग से लेकर रोज रिक्शा चलाकर कमाने वाले वर्ग तक भोजन उपलब्ध कराना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इस नेक कार्य में देश के सबल और समर्थ नागरिकों को आगे आना चाहिए। मेरे शहर में ऐसा हुआ भी है और यहां पर सामाजिक संस्थाओं से लेकर राजनीतिक दलों के लोगों ने अपनी पूरी सहभागिता निभाई है। खतरा केवल इस बात का नहीं है कि लॉकडाउन से हम कोरोना महामारी से बचेंगे या नहीं। खतरा इस बात का भी है कि लॉकडाउन के बाद भी जब जिंदगी पटरी पर लौटेगी तब भी इसे व्यवस्थित करने के लिए संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। देश के सांसदों से लेकर उद्योगपतियों ने पीएम रिलीफ फंड और सीएम रिलीफ फंड में आर्थिक योगदान दिया है। मेरी अपील समाज के सभी वर्गों से यह है कि हमें आपदा की इस घड़ी में एक साथ मिलकर आगे आना है। हमारे देश को जब हमारे धन की जरूरत है तो हम देश को कमजोर नहीं होने देंगे और पूरा सहयोग करेंगे। हमें लॉकडाउन के पीरियड में पूरा सहयोग करना है। राष्टÑ के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने का यही मौका आपको मिला है। वतन की माटी के प्रति कर्ज चुकाने का समय यही मिला है और हमें इस बात का ध्यान रखना है कि अपने आस-पास रह रहे जरूरतमंद की जरूरतों का ध्यान बिना प्रदर्शन के ही पूरा करें। कई बार मदद ऐसे भी की जाती है कि इस हाथ से मदद होती है और उस हाथ को पता नहीं चलता। तो हम देश के खजाने में अपना योगदान एक नागरिक के रूप में सुनिश्चित करें और एक गरीब परिवार के खाने में अपने योगदान को सुनिश्चित करें। हम याद रखें कि आज हमारे देश को हमारी जरूरत पड़ी है और वतन को जरूरत हैं तो हम अपने वतन की आन, बान, शान बनकर पूरी तरह से तन, मन, धन से साथ हैं। मेरी देश के सभी नागरिकों से अपील है कि पीएम रिलीफ फंड और सीएम रिलीफ फंड में अपना पूर्ण सहयोग करें। क्योंकि हमारा यह सहयोग ही हमारे देश के मजबूती देगा और इसी सहयोग से हम अपने देश के लाखों नागरिकों की जिंदगी को सुरक्षित रखने में सफल हो जाएंगे।

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