हर सुबह ईद, हर रात दीवाली हो

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ईद के मुकद्दस पर्व में जिस तरह से हिन्दु मुस्लिम भाईयों ने भाईचारे का संदेश दिया, गर्मजोशी से गले मिल एक दूसरे को बधाई दी, आपस में प्यार और खुशियों को बाटा, उसे देखकर लगा की, समाज आपस में अमन और भाईचारा चाहता है। (ghaziabad hindi news, ) ईद के दिन में अपने कई मुस्लिम भाईयों के यहां गया, जितनी गर्मजोशी से उन्होंने गले मिलकर मेरा और मेरे साथ गये मित्रों का स्वागत किया, उसे देखकर लगा कि हमारा शहर कितना अमन पंसद है, और यहां कि फिजा में कोई असमाजिक तत्व कितना ही जहर घोलना चाहे, वह उसमें कामयाब नहीं हो सकता। खुदा की इबादत में हाथ उठाने वाले मंदिर गुरूद्वारों में पहुंचकर माथा टेकने वाले सभी चेहरे एक साथ नजर आये। ये भाईचारा नहीं तो ओर क्या है। इसे देखकर ऐसा महसूस होता है कि इंसान की हर जिंदगी की हर सुबह ईद की तरह तो रात दीवाली की तरह मने। सब यू ही मिलकर एकता का संदेश दें, ओर खुशी और गम सब आयोजनों में एक साथ शरीक हों। कोई भी मजहब आपस में बेर रखना नहीं सिखाता, लेकिन चंद ऐसे चेहरे जो साम्प्रदायिकता की आड में अपने अनैतिक कार्य साधना चाहते हैं, वह कभी कभी अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं। कोई भी अगर इस तरह की घटना होती है तो हमे उस पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए। हमे हर उस पहलू की गहराई में जाना चाहिए, जिसकी वजह से माहौल खराब करने की कौशिश की गई है, क्योंकि विवाद कितना ही बड़ा क्यों न हो, उसका अंत में समाधान आपसी बातचीत से ही निकलता है।

ईद के पर्व में जिस तरह हिन्दू भाईयों ने आगे बढ़कर मुस्लिम भाईयों को गले लगाया है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि जनता दंगा नहीं अमन और शांति चाहती है। खासतौर पर सभी अमन पंसद लोगों को अब एकजुट हो जाना चाहिए, और भाईचारे का संदेश देने के लिए नये दौर की शुरूआत करनी चाहिए। ऐसा करने में अगर हम कामयाब हो जाते हैं तो कोई भी असामाजिक तत्व अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो जायेगा। हर सुबह ईद और हर रात दीवाली का माहौल बनता चला जायेगा।