कमजोर अंग्रेजी के चलते पुलिस नहीं समझ पाई कोर्ट का आदेश, युवक को जेल में बितानी पड़ी रात

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पटना (ईएमएस)। अंग्रेजी भाषा को न समझने की गफलत में बिहार के जहानाबाद की पुलिस ने एक युवक को वेवजह ही रातभर लॉकअप में बंद रखा। दरअसल, पत्नी के साथ तलाक का केस लड़ रहे मिठाई के एक दुकानदार को पुलिसकर्मियों की खराब अंग्रेजी की वजह से पूरी रात लॉकअप में गुजारनी पड़ी। पुलिसकर्मियों ने कोर्ट के आदेश के ऊपर लिखे वॉरंट को गलती से ‘अरेस्ट वॉरंट’ समझ लिया था। यह घटना बिहार के जहानाबाद के रहने वाले नीरज कुमार के साथ हुई। नीरज का अपनी पत्नी के साथ तलाक का केस चल रहा है। वह अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं दे पा रहे थे, इसलिए कोर्ट ने उनकी प्रॉपर्टी की डीटेल्स जानने के लिए वॉरंट दिया था। पुलिस ने गलती से इसे अरेस्ट वॉरंट समझ लिया था। नीरज को पटना फैमिली कोर्ट में पेश किया गया, जहां जज को पुलिस की गड़बड़ी समझ में आ गई और फौरन नीरज की रिहाई का आदेश जारी कर दिया गया।
फैमिली कोर्ट वकील यशवंत कुमार शर्मा ने कहा कि कोर्ट के द्वारा जारी किए गए इस तरह के वॉरंट को ‘डिस्ट्रेस वॉरंट’ कहा जाता है। इसमें पति की प्रॉपर्टी डीटेल्स के मूल्यांकन का निर्देश रहता है। हालांकि इस केस में पुलिस ने इसे अरेस्ट वॉरंट समझ लिया। जहानाबाद के एएसपी (हेडक्वॉर्टर) पंकज कुमार ने कहा, पूरे डॉक्युमेंट में कहीं भी पुलिस को नीरज को अरेस्ट करने का निर्देश नहीं था। नीरज अपनी पत्नी को हर महीने 2500 रुपये का गुजारा भत्ता नहीं दे पा रहे थे, इस वजह से कोर्ट ने उनकी अचल संपत्ति की जानकारी के लिए निर्देश जारी किया था। वहीं नीरज कुमार ने कहा, साल 2012 में मेरी शादी के बाद से ही पत्नी के साथ विवाद चल रहा था। पत्नी ने मेरे खिलाफ दहेज का केस भी कर दिया था, जिसके बाद 2014 में मैंने तलाक की अर्जी डाल दी। मेरे ससुर बिहार पुलिस में हैं और उन्होंने मामले को रफा-दफा करने के लिए 10 लाख रुपये मांगे। दहेज के एक केस में पटना कोर्ट ने मुझे 3 साल जेल की सजा भी सुनाई, लेकिन मुझे जमानत मिल गई।