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भारत के लिए सपना होगी 10 फीसदी ग्रोथ!

नई दिल्ली। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि भारत अब तक की सबसे खराब यानी भीषण आर्थिक मंदी की स्थिति का सामना कर रहा है। क्रिसिल के अनुमान के अनुसार चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ में कुल 5 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। सबसे खराब स्थिति चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून में होगी। इस दौरान जीडीपी ग्रोथ में 25 फीसदी बड़ी गिरावट आ सकती है। इधर एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही यानी जनवरी से मार्च-2020 के दौरान देश की ग्रोथ रेट 1.2 फीसदी रहने का अनुमान है। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सरकार इस साल के अंत तक एक और आर्थिक पैकेज ला सकती है। गौरतलब है कि आरबीआई पहले ही कह चुका है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ नेगेटिव जोन में जा सकती है।

बड़ी गिरावट को रहें तैयार
क्रिसिल ने कहा कि भारत अब तक की सबसे खराब मंदी की स्थिति का सामना कर रहा है। आजादी के बाद यह चौथी और उदारीकरण के बाद पहली मंदी है और यह संभवत: सबसे भीषण है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार कोविड -19 संकट और लॉकडाउन से चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 5 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है। चालू वित्त वर्ष पहली तिमाही, अप्रैल से जून में ग्रोथ रेट 25 प्रतिशत की बड़ी गिरवट की आंशका है। अगर तकनीकी तौर पर देखा जाए तो यह नुकसान इतना बड़ा है कि करीब 10 प्रतिशत जीडीपी स्थायी तौर पर खत्म हो सकती है। ऐसे में हमने महामारी से पहले जो ग्रोथ रेट देखी है, अगले तीन वित्त वर्ष तक उसे देखना या हासिल करना मुश्किल होगा।

जनवरी-मार्च तिमाही पर भी असर
एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार अंतिम तिमाही के दौरान 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जीडीपी ग्रोथ पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में 4.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2020-21 में नकारात्मक 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) 29 मई को वित्त वर्ष 2020 की चौथी तिमाही के जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों की घोषणा करेगा। पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर सात साल के निचले स्तर 4.7 प्रतिशत पर आ गई थी।

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