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केवल बुखार-खांसी और गला खराब होने से न डरें, सतर्क रहें-डा बृजपाल त्यागी

गाजियाबाद । अगर आपका गला खराब है और खांसी के साथ बुखार भी है आवाज बैठ गई है तो यह सामान्य फ्लू के लक्षण हो सकते हैं। कोरोना संक्रमण में आवाज नहीं बदलती। आवाज न बदलने से यह साफ हो जाता है कि कोरोना वायरस का संक्रमण बोलने के धागे को प्रभावित नहीं कर रहा है। यह बातें प्रोफेसर डा बृजपाल त्यागी नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ ने कहीं। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बाद स्वास्थ्य हुए 100 मरीजों से बात करके वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।

डाण् बृजपाल त्यागी बताते हैं कि कोरोना संक्रमितों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। एकए पल्मोनरी और दूसरे, नॉन पल्मोनरी। पल्मोनरी मरीज कोरोना संक्रमण होने के चौथे दिन जाकर सांस में दिक्कत महसूस करते हैं। लेकिन मरीज अपने आपको ठीक समझता है। इसे हेप्पी हाईपोक्सिया कहते हैं। लेकिन सांस लेने में दिक्कत महसूस होने पर लापरवाही ठीक नहीं है तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए। दूसरी श्रेणी नॉन पल्मोनरी यानी फेफड़ों से संबंधित न होना। ऐसे मरीजों के बारे में डा त्यागी बताते हैं कि उन्हें बुखार, बदन दर्द, दस्त, सूखी खांसी , आवाज का न बैठना, सूंघने की शक्ति और खट्टे को छोड़कर सारे स्वाद महसूस होते हैं। यह संक्रमण उतना खतरनाक नहीं होता, देखा गया है कि साधारणतया यह जानलेवा भी नहीं होता। ऐसे मरीजों को डाक्टर के संपर्क में तो रहना चाहिए लेकिन 14 दिन तक आईसोलेट रहेंए वैसे 9 दिन में उनका स्वास्थ्य ठीक होने लगता है। नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डा नवनीत वर्मा ने बताया किसी व्यक्ति को खांसी. जुकाम और हल्का बुखार भी हो तो हम इसको कोरोना का संक्रमण तब तक नहीं मानेंगे जब तक कि उसे लगातार चार.पांच दिन न हो गए हों। अगर साथ में सांस लेने की दिक्कत जुड़ गई है और कान बंद होने के साथ सूंघने की शक्ति प्रभावित होने के लक्षण कोरोना की तरफ इशारा करते हैं। ध्यान रहे कि अगर किसी का आॅक्सीजन सैचुरेशन 95 से कम हो गया हैए तब हम इसे कोरोना संक्रमण मानकर जांच कराने की सलाह देते हैं। केवल बुखार आने से न डरेंए यह सामान्य फ्लू भी हो सकता है। डाक्टर को दिखाएं और साथ में गुनगुना पानी पीते रहें और आराम करते रहें। अगर लक्षण बिगड़ते हैं तो तत्काल डाक्टर से संपर्क करें। बेहतर हो कि किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। बता दें कि जनपद में सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फीवर डेस्क बनाई गई है। जहां थर्मल स्कैनिंग के अलावा आॅक्सीमीटर से आपके शरीर में आॅक्सीजन के सैचुरेशन की भी जांच की जाती है।

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