पेट दर्द को हल्के में न लें यह आंतों या पेट के कैंसर का लक्षण भी हो सकता है

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नई दिल्ली (ईएमएस)। पेट में होने वाले दर्द को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। पेट में दर्द है तो यह आंतों या फिर पेट के कैंसर का एक लक्षण भी हो सकता है। पेट या आंत का कैंसर भारत में चौथा सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को होने वाला कैंसर बन गया है। पिछले साल इस कैंसर के 57,394 मामले सामने आए। यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा प्रभावित करता है। डॉक्टरों का कहना है कि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल यानी आंत या पेट के कैंसर के ज्यादातर मरीजों को शुरुआत में सामान्य लक्षणों का अहसास होता है। जैसे कि पेट दर्द और असहजता होना, लगातार अपच बने रहना, मलत्याग की आदत में गड़बड़ी होना आदि। यह साइलेंट किलर के रूप में धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और शरीर के आंतरिक अंगों जैसे बड़ी आंत, मलाशय यानी कोलोन, भोजन की नली, पेट, गुर्दे, गॉल ब्लैडर, पैनक्रियाज ग्रंथि, छोटी आंत, अपेंडिक्स और एनस को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का कहना है, ‘हमें आंत या पेट के कैंसर की प्रकृति के संबंध में जागरुकता और इसका जल्दी से जल्दी पता लगाने के लिए जांच कार्यक्रमों की उपलब्धता की काफी आवश्यकता है। अपर जीआई की स्क्रीनिंग, कोलोनोस्कोपी और एनबीआई एंडोस्कोपी की मदद से पेट या आंत के कैंसर का जल्द से जल्द पता लगाने में मदद मिलती है। प्रतिरोधी पीलिया और गॉल ब्लैडर की थैली में कैंसर की पुष्टि सीटी स्कैन, एमआरआई और ईआरसीपी से नहीं होती। लैन्जियोस्कॉपी की मदद से कैंसर को देखने और उनके टिशूज का परीक्षण करने में मदद मिलती है। इससे गॉल ब्लैडर की थैली के कैंसर का जल्द पता लगाया जा सकता है, जिसका किसी परंपरागत उपकरण या रूटीन जांच से पता नहीं लगाया जा सकता।’ विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर जब भी पेट में दर्द होता है तो हम इसे आम बात समझ लेते हैं। सोचते हैं कि यह गैस या फिर इंफेक्शन की वजह से हो रहा होगा। नतीजा यह होता है कि हम पेनकिलर के जरिए पेट दर्द से राहत पाने की कोशिश करते हैं। स्थिति जब काबू से बाहर होती नजर आती है तभी हम डॉक्टर के पास जाते हैं। ये ठीक तरीका नही है, यह आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।