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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

कोरोना काल में सेफ और स्वस्थ रहा है जिला गाजियाबाद

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। कोरोना महामारी के बाद दिल्ली से सटा गाजियाबाद एक बार कोरोना केस के आंकड़ों को लेकर हिल गया था। यहां के प्रशासन और चिकित्सा विभाग ने दिन-रात भागदौड़ कर स्थिति पर काबू पाया। वहीं यहां के लोगों की भी तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कोरोना एडवाइजरी का पालन किया। अब एक महीने की रिपोर्ट ये बता रही है कि कोरोना के मामले में गाजियाबाद पूरी तरह सेफ रहा है। यहां काफी कृपा रही है और खासतौर से मध्यम वर्गीय कॉलोनियों और मलिन बस्तियों में कोरोना के केस काफी कम आए हैं। यदि एक महीने के कोरोना कार्ड पर नजर डालें तो सीन काफी सॉफ्ट हैं। करंट क्राइम ने एक महीने के आंकड़ों को लेकर पड़ताल की तो गाजियाबाद के लोग कोरोना मामले में खुद को सेफ मान सकते हैं। हालांकि सावधानी जरूरी है और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

18 अगस्त से 18 सितंबर तक के कोरोना आंकड़े दे रहे हैं सेफ संदेश

करंट क्राइम ने जब 18 अगस्त से 18 सितंबर के कोरोना काल में गाजियाबाद की स्थिति को लेकर नजर डाली तो यहां आंकड़े एक सेफ संदेश दे रहे हैं। यहां केस बढ़े तो हैं, लेकिन राहत भरी बात ये है कि पॉजिटिव के बाद नेगेटिव होने के मामले तेजी से बढ़े हैं। अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले लोगों की संख्या बढ़ी हैं। 18 अगस्त को यदि एक ही दिन में 1071 मामले कोरोनापॉजिटिव थे तो 17 सितंबर को यह आंकड़ा 2125 पहुंचा है। इन तीस दिनों में एवरेज पॉजिटिव मामले कंट्रोल की स्थिति में रहे हैं। बड़ी बात यह है कि रिकवरी का रेट काफी तेजी से बढ़ा हैं। लगभग 80 प्रतिशत मामलों में तेजी से रिकवरी हुई है। जिन मामलों में मृत्यु हुई है उनमें कोरोना के साथ-साथ पीड़ित का अन्य बीमारियों से भी प्रभावित होना बताया गया है।

एक महीने में जिले में कोरोना से हुई है केवल 7 लोगों की मृत्यु

यदि आंकड़ों पर निगाह डालें तो पता चलता है कि गाजियाबाद में कोरोना पॉजिटिव तो मिला है, लेकिन कोरोना किसी के लिए काल बने इसमें बहुत तेजी से कमी आई है। 18 अगस्त से 18 सितंबर तक एक महीने के कोरोना काल में केवल 7 लोगों की मृत्यु हुई है। अगस्त के महीने में कोरोना से निधन होने वाले लोगों की संख्या 67 थी और 18 सितंबर तक यह संख्या 74 हुई है। इनमें बताय ये जाता है कि जिन 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है वह लोग कोरोना के अलावा कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित थे।

जिला प्रशासन ने कोरोना को लेकर किया है थीम पर काम

कोरोना काल में गाजियाबाद के स्थानीय जिला प्रशासन ने वास्तव में एक रणनीति के साथ काम किया है। इसके लिए गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडेय और उनकी पूरी टीम को क्रेडिट जाता है। सीरो सर्वे से लेकर डोर-टू-डोर सर्वे के जरिए कोरोना पेशेंट का पूरा अपडेट रखा है। लोगों को इस बात के लिए जागरूक किया है कि वह कोरोना लक्षण छुपाने के बजाए खुद आगे आकर जांच कराएं। बड़ी बात यह है कि जब कोरोना पॉजिटिव होकर लोग अस्पताल पहुंचे तो यहां जिला प्रशसन ने उनके लिए किताबों की व्यवस्था की। खुद डीएम ने कोरोना पेशेंट्स से फोन पर बात की, उन्हें पत्र भेजा और कोरोना की जांच के लिए गाजियाबाद में कई सेंटर खोले गए। लोगों ने भी कोरोना एडवाइजरी का पालन किया है और अब गाजियाबाद के लोगों को सावधान तो रहना है, लेकिन डरने की कोई जरूरत नहीं है।

गाजियाबाद के चिकित्सा विभाग ने भी किया है रिकॉर्ड काम

आलोचना बेहद आसान होता है, लेकिन यदि किसी ने चुनौती भरे माहौल में काम किया है तो वह गाजियाबाद का चिकित्सा विभाग है। यहां के सीएमओ और अन्य सरकारी डॉक्टर्स ने पूरी मुस्तैदी से काम संभाला है। कोरोना जांच में रिकॉर्ड काम किया है। डोर-टू-डोर सैंपल लिए हैं और इसी का नतीजा है कि अब अस्पतालों में बैड खाली हैं। लोगों को यह समझाया है कि वह सामान्य खांसी, बुखार में परेशान ना हों। निजी डॉक्टर्स को समझाया है कि वह जांच जरूर करें और किसी भी तरह का पैनिक ना फैलाएं। लोगों को जागरूक किया है कि वह मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। यहां पर ईएसआई अस्पताल के समस्त स्टाफ और डॉक्टर्स की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कोरोना जैसी महामारी में बेहद सटीक तरीके से काम किया। मरीजों को बिल्कुल भी भयभीत नहीं होने दिया और उनका मनोबल ऊंचा रखा। यहां से सैकड़ों लोग पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर गए।

नोएडा का भी कोरोना अपडेट रहा है सुकून देने वाला

गाजियाबाद और नोएडा दोनों ही जिलों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि ये दोनों जिले दिल्ली से सटे हैं। दिल्ली को कोरोना का सबसे बड़ा कैरियर माना जा रहा था, लेकिन यदि बात नोएडा की करें तो नोएडा का रिपोर्ट कार्ड गाजियाबाद से भी अच्छा रहा है। यहां भी प्रशासन और नोएडा अथॉरिटी के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग ने भी शानदार टीम वर्क के साथ काम किया है। नोएडा एक महीने में केवल पांच मामले ऐसे सामने आए हैं जहां कोरोना से मृत्यु हुई है। यहां 18 अगस्त को 7701 एक्टिव केस थे और 18 सितंबर तक यह 2004 रह गए। नोएडा में 18 अगस्त को कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 43 था और 18 सितंबर को यह आंकड़ा 48 तक पहुंचा है। यहां एक महीने में केवल 5 लोग कोरोना के चलते मौत का शिकार हुए हैं। यहां भी यही बताया गया है कि कोरोना से मरने वाले पांच लोगों को अन्य गंभीर बीमारियां भी थीं।

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