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जनरल के घर पर जिला पंचायत की महाभारत का रोल वितरण

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। दावत लोकसभा सांसद जनरल वीके सिंह के घर पर थी और इस दावत में मेयर, पार्षद के अलावा वह चेहरे भी पहुंचे थे जो जिला पंचायत की महाभारत के मुख्य किरदार है। माहौल दावत का था लेकिन जिक्र महाभारत का भी चला। दावत में जिला पंचायत की महाभारत के अर्जुन भी थे और अर्जुन के साथ-साथ महाभारत के अन्य चेहरों के किरदार भी तय हो गए। जब किरदार तय हुए तो जिन्हें भीष्म पितामह बनाया गया था, उन्हें ही कहना पड़ा कि कोई महाभारत नहीं हो रही है और पार्टी जैसे आदेश करेगी, वैसे ही काम करेंगे। न कोई भीष्म है और न कोई अर्जुन है। वैसे जनरल के घर पर दावत में भी महाभारत के किरदार तय हो गए थे। कोई विदूर बना तो किसी को कर्ण की भूमिका मिल गई। बड़ी बात यह है कि दुर्योधन के नाम पर किसी का जिक्र नहीं हुआ और महाभारत के अर्जुन के साथ-साथ जिला पंचायत के श्रीकृष्ण भी इस दावत में मौजूद थे।
क्यों बोल पड़े नंदकिशोर
कि मैं हंू सारथी
माहौल दावत का था और यहां लोनी के चेहरे भी मौजूद थे। लोनी वाले जिला पंचायत की महाभारत में पूरी रूचि ले रहे हैं। यहां पवन मावी, विधायक नंदकिशोर गुर्जर, महानगर उपाध्यक्ष सुरेंद्र नागर, पूर्व विधायक प्रशांत चौधरी मौजूद थे। योगेंद्र मावी लोनी की राजनीति में विशेष रूचि रखते हैं। महानगर उपाध्यक्ष सुरेंद्र नागर की रूचि भी जिला पंचायत में ज्यादा नजर आई। अब बात जिला पंचायत के अर्जुन से शुरू हुई और यह कहा गया कि स्पष्ट तो करो कि इस अर्जुन का सारथी कौन है। इतना सुनते ही लोनी विधायक नंदकिशोर ने अपनी खामोशी तोड़ी और कहा कि महाभारत के अर्जुन पवन मावी का सारथी मैं हंू। स्पष्ट हो गया कि जिला पंचायत की महाभारत में यदि पवन मावी खुद को अर्जुन बता रहे हैं तो अब सारथी ने खुद आकर बता दिया कि मैं सारथी हंू। तब किसी ने कहा भी कि आप तो नाम से ही श्रीकृष्ण है तो सारथी तो आपको होना ही है।
अनिल कसाना को कर्ण बताकर क्यों हुई बलिदान की चर्चा
जब जिला पंचायत की महाभारत के किरदार तय हो रहे थे तो नंबर पूर्व विधायक प्रशांत चौधरी का आया। प्रशांत चौधरी को देहात की राजनीति का रिंग मास्टर कहा जाता है। किसी ने जब पूर्व विधायक प्रशांत चौधरी का किरदार पूछा तो एक आवाज आई कि यह तो इस महाभारत के भीष्म पितामह है। तब प्रशांत ने कहा कि न मैं भीष्म पितामह हंू और न ही कोई दुर्योधन है। हम सब भाजपा कार्यकर्ता हैं और जैसे पार्टी आदेश देगी, वैसे काम करेंगे। लेकिन जब रोल बंट ही रहे थे तो सबके बोल भी बंद नहीं हो रहे थे। जिक्र अनिल कसाना का आया और कहा गया कि पवन मावी अर्जुन है तो अनिल कसाना कर्ण है। अब अनिल कसाना को कर्ण बताने के बाद एक ने कह दिया कि कर्ण का तो बलिदान बड़ा है।
नहीं पहुंचे रमेश चंद तोमर और बालेश्वर त्यागी
जनरल की दावत से पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर और पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी ने खुद को दूर रखा। पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर तो धौलाना चुनाव से ही जनरल को लेकर मोर्चा खोल चुके हैं। वही बालेश्वर त्यागी ने कुछ दिन पहले ही बाहरी अटैक किया था। जनरल खेमा बता रहा है कि पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर और बालेश्वर त्यागी को विधिवत निमंत्रण दिया गया था। लेकिन जनरल के निमंत्रण पर भी पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री उनकी दावत से दूर ही रहे। माना जा रहा है कि दूरियां बढ़ रही है। यहां खास बात यह है कि खुद को बालेश्वर त्यागी का ब्लाइंड सपोर्टर बताने वाले निगम पार्षद हिमांशु लव जनरल की दावत में दिल्ली भी पहुंचे और दावत के फोटो सोशल मीडिया पर भी अपलोड किए।
बसंत त्यागी को क्यों मिली विदुर की भूमिका
जिला पंचायत महाभारत में किरदार वितरण के दौरान योगेंद्र मावी ने भाजपा जिलाध्यक्ष बसंत त्यागी की ओर देखा और कहा कि इनकी भूमिका क्या रहेगी। पहले तो बसंत त्यागी को संजय का किरदार दिया गया। फिर कहा गया कि यह विदुर की भूमिका में ठीक रहेंगे। बसंत त्यागी को विदुर का किरदार मिलते ही पंचायत की महाभारत के श्रीकृष्ण उखड़ गए और बोले कि मेरे और बसंत त्यागी के रास्ते एक है। फिर यह तो कलियुग की महाभारत है इसमें पता नहीं कौन जीतेगा। फिर कहा गया कि इतिहास से छेड़छाड़ नहीं हो सकती, क्योंकि इतिहास से छेड़छाड़ के चक्कर में तो पद्मावती रिलीज नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही महाभारत का द एंड हो गया।

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