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वाड्रा के जमीन सौदों पर ढींगरा आयोग रपट सौंपेगा

चंडीगढ़| कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के जमीन सौदों सहित गुड़गांव में अन्य विवादास्पद जमीन सौदों की जांच के लिए हरियाणा सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय न्यायमूर्ति एस.एन. ढींगरा जांच आयोग बुधवार को अपनी रपट राज्य सरकार को सौंप रहा है। नई दिल्ली से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए न्यायमूर्ति ढींगरा ने संवाददाताओं से कहा कि वह अपनी रपट बुधवार को सौंप रहे हैं। आयोग का कार्यकाल बुधवार को समाप्त हो रहा है। आयोग की वैधता को लेकर उपजे विवादों के बीच हरियाणा सरकार ने गत 30 जून को आयोग का कार्यकाल आठ सप्ताह के लिए बढ़ा दिया था। वाड्रा और उनकी कंपनी से जुड़े जमीन सौदों समेत हरियाणा के विवादास्पद जमीन सौदों की जांच के लिए हरियाणा की भाजपा सरकार ने गत साल मई महीने में आयोग का गठन किया था। आयोग को गुड़गांव सेक्टर 83 और अन्य प्रमुख इलाकों में व्यावसायिक संपत्तियों के विकास के लिए वाड्रा की कंपनी और अन्य को दिए गए लाइसेंसों की जांच करने के लिए कहा गया था। कालान्तर में जमीन के हस्तान्तरण या बिक्री, निजी समृद्धि के आरोपों, नियमानुसार लाभार्थियों की अपात्रता और अन्य संबंधित मामलों की जांच करना आयोग के लिए आवश्यक था। वाड्रा ने जांच आयोग को उनके खिलाफ हरियाणा की भाजपा सरकार का राजनीतिक से प्रेरित अभियान बताया था। वाड्रा के साथ ही हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को आयोग ने समन भेजा था, लेकिन दोनों ने जांच में शामिल होने से मना कर दिया था। गत साल अगस्त महीने में आयोग का दायरा बढ़ा दिया गया और उसे हरियाणा की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा गुड़गांव के चार गांवों में सभी नई बस्तियां बसाने वालों और व्यक्तियों को दिए गए लाइसेंसों की जांच करने को कहा गया था। गुड़गांव के सेक्टर 83 में व्यावसायिक संपत्तियों के विकास के लिए वाड्रा और अन्य को लाइसेंस जारी करने में हरियाणा सरकार द्वारा कथित रूप से पक्षपात किया गया था। ढींगरा दिल्ली उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने कहा था कि वित्तीय पर्याप्तता पर वाड्रा की कंपनी, स्काईलाइट हॉस्पीटेलिटी ने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया था, बावजूद इसके उनकी कंपनी को लाइसेंस दिया गया।  पहले हुड्डा ने यह कहते हुए आयोग के गठन का विरोध किया कि “यह स्थापित नियमों और शर्तो के विपरीत, मंत्रिमंडल की बिना समुचित अनुमति के, द्वेष और राजनीति से प्रेरित है।” उन्होंने हयिाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी से जांच आयोग के गठन को रद्द करने का अनुरोध किया था।

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