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सीएम योगी के दरबार में पहुंचा करंट क्राइम अखबार

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम )

गाजियाबाद। स्कूलों में फीस वृद्वि का मामला अब सीएम योगी के दरबार तक पहुंच गया हैं। मुरादनगर विधायक अजितपाल त्यागी, लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर, व साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर निजी स्कूल संचालकों द्वारा की जा रही मनमानी व धांधली की शिकायत करते हुए कार्यवाही की मांग की है। खास बात ये है कि विधायकों ने अपने पत्र के साथ जमीनी हकीकत लिखने वाले समाचार पत्र करंट क्राइम व अमर उजाला की मूल प्रति भी भेजी है।
गौरतलब है कि निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाये जाने के विरोध में अभिभावक विरोध कर रहें थे। अभिभावक इस मामलें में जिलाधिकारी निधि केसरवानी के पास भी पहुंचे। तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा इस मामले में स्कूल संचालक और अभिभावकों की एक मीटिंग बुलाई थी। इससे पहले 18 अप्रैल को भी एडीएम वित्त द्वारा एक बैठक बुलाई गई थी। 26 अप्रैल को जब बैठक बुलाई गई तो जिलाधिकारी ने कह दिया कि एक स्कूल से सिर्फ दो अभिभावक बुलाये जायेंगे। जब अभिभावकों ने विरोध किया तो पुलिस बुला ली गई। इसी के बाद हजारों अभिभावक भड़क गये। लोग सड़क पर आ गये। जाम लग गया और इंसाफ मागंने आये लोगों को इंसाफ के बदले पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं। करंट क्राइम ने इस पूरी घटना का सच समाचार के माध्यम से जनता के सामने रखा था। इतना ही नहीं ‘करंट कॉलम’ के जरिए हमने महानगर के भाजपा विधायकों को भी निशाने पर लिया था। सड़कों पर गर्मी में पब्लिक बेहाल थी और भाजपा का कोई भी विधायक जनता के बीच नहीं पहुंचा। जनआंदोलन है तो जनता का वो प्रतिनिधि कहां है जिसे जनता ने चुना है। अब भाजपा विधायक सामने आये हैं। भाजपा विधायकों ने अपने पत्र के जरिये इस मुद्दे पर सीधे मुख्यमंत्री से संवाद कायम करते हुये जनता का दर्द और स्कूलों के साथ-साथ फर्जी पीटीए तक की शिकायत की है।
ये कहा विधायकों ने अपने पत्र में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा, लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर व मुरादनगर विधायक अजितपाल त्यागी ने कहा है कि वर्तमान में पूरे प्रदेश में प्राईवेट स्कूलों ने फीस के नाम पर ट्यूशन फीस, वार्षिक फीस, भवन फीस व अन्य मुद्दों में आम जनता से लूट का खुला माहौल बना दिया है। इन स्कूलों ने शिक्षा को पूर्णत: व्यापार बना दिया है। मजबूर अभिभावकों के पास इनकी मनमानी मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। हालात यह है कि जनता के पास स्कूलों की फीस देने के बाद घरों में राशन के लिये पैसे नहीं बचते हैं।
महोदय इन स्कूलों के मैनेजमेंट, विकास प्राधिकरण, आवास विकास व फर्जी तरीके से बनाई गई पेरेंट्स टीचर एसोसिएशन का गठजोड़ बनाकर सारे सरकारी कानून-नियमों व आदेशों की धज्जिया उड़ाई जा रही हैं। जो भी अभिभावक इनके खिलाफ बोलता है उनके बच्चों का भाविष्य खराब करने के लिये ये किसी भी हद तक जा सकते हैं। जिससे डर के मारे अभिभावक कुछ नहीं कर पाते हैं।
महोदय आपसे मार्मिक निवेदन है कि इस शिक्षा के व्यावसायिक करण को रोकते हुए कोई ठोस शिक्षा नीति बनाई जाये। आपसे यह भी निवेदन हैं कि जब तक यह नीति न बन जाये तब तक आपातकालीन गाइडलाइंस इन सभी शिक्षण संस्थानों को जारी करवाने की कृपा करें एवं प्रबंधन समिति को भंग करके प्रशासक नियुक्त कराया जाये क्योंकि वर्तमान में नया शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है। स्कूलों के द्वारा मांगी जा रही अनाप-शनाप फीस से अभिभावकों में हाहाकार मचा हुआ है। इसके अलावा ईडब्लूएस की सीटों को भरने में भी भारी धांधली चल रही है। विकास प्राधिकरण व जिलाधिकारी की निगरानी में ईडब्लूएस की सीटों को भरने का पारदर्शी सिस्टम बनाना भी जरूरी है। 26 अप्रैल को गाजियाबाद में जिला मुख्यालय परिसर में अभिभावकों द्वारा धरना प्रर्दशन किया गया।
जिसमें हजारों अभिभावकों ने हिस्सा लिया। धरने में कोई निणर्य न आने के कारण क्षेत्र में शांति भंग की स्थिति बन गई थी। ऐसी स्थिति दोबारा न बनें। जल्द ही दुबारा निर्णय लेने का कष्ट करें।

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