सीआरपीएफ काफिले पर आतंकियों का बड़ा हमला, 30 जवान शहीद आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली आंतकी हमले की जिम्मेदारी

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श्रीनगर (ईएमएस)। घाटी में ऑपरेशन आल आउट चला रही सेना पर गुरुवार को बड़ा आंतकी हमला किया। जम्मू-कश्मीर पुलवामा जिले में गुरुवार शाम हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 30 जवान शहीद हो गए हैं। शहीद जवानों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। उरी में सितंबर 2016 में हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीर में यह सुरक्षाबलों पर अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। गुरुवार को श्रीनगर-जम्मू हाइवे पर स्थित अवंतिपोरा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ के एक काफिले को निशाना बनाया। इस हमले के बाद दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अलर्ट जारी किए गए हैं। श्रीनगर-जम्मू हाइवे पर स्थित अवंतीपोरा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया है। इसके बाद दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अलर्ट जारी किए गए हैं। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है।
मिल रही जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों पर हमला किया गया। सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने इलाके में पहले हाइवे खड़ी एक कार में प्लांट की गई आईईडी में ब्लास्ट किया और फिर सीआरपीएफ जवानों के वाहनों पर ऑटोमैटिक हथियारों से गोलीबारी की। इस हमले में सीआरपीएफ का वाहन भी आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गया, इस हमले में 16 जवान घायल हुए। हमले के बाद जवानों को तुरंत श्रीनगर के हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का काम शुरू किया गया, लेकिन अस्पताल में ले जाते वक्त 12 जवान शहीद हो गए। इसके अलावा अन्य 40 से अधिक जवानों जवानों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराकर इनका इलाज शुरू कराया गया। जिस काफिले पर हमला हुआ, वह जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था। इसमें 2 हजार से अधिक जवान शामिल थे।
आंतकी हमले के बाद तत्काल पुलवामा में मौजूद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की अन्य कंपनियों को अवंतिपोरा भेजा गया। आतंकी वारदात के बाद सेना ने फिलहाल जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर ट्रैफिक बंद करते हुए अवंतिपोरा और आसपास के इलाकों में बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। इसके अलावा पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और श्रीनगर जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर गुरुवार को हुआ यह हमला आतंकी हमले की पहली वारदात नहीं है। इसके एक साल पहले 15 फरवरी 2018 को आतंकियों ने पुलवामा के पंजगाम स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक कैंप पर हमला किया था। इस वारदात के दौरान आतंकियों ने सीआरपीएफ के शिविर पर हमला कर कैंप में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन जवानों की सतर्कता के कारण कामयाब नहीं हो सके थे।
बता दें कि खुफिया एजेंसी ने 8 फरवरी को हमले का अलर्ट जारी किया था। सूत्रों के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी घाटी छोड़कर देश के मैदानी इलाकों में बड़ी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में है। एजेंसियों ने अपने अलर्ट में कहा था कि सीमा से आए आतंकी चुनाव के समय में रैलियों और बड़े नेताओं को निशाना बना सकते हैं। बता दें कि दिसंबर 2018, जैश का टॉप ट्रेनर कमांडर अब्दुल रशीद गाजी जम्मू-कश्मीर में घुसने में कामयाब रहा था।