राफेल केस में लीक दस्तावेजों पर केंद्र के विशेषाधिकार पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

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लोकसभा चुनाव के घोषणा के बाद चुनावी शोर के बीच सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को राफेल मामले से जुडी पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हुई। गुरुवार को राफेल डील में अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लीक दस्तावेजों पर केंद्र के विशेषाधिकार के दावे पर ऑर्डर सुरक्षित रख लिया। दरअसल, केंद्र सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों से संबंधित दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा किया और सुप्रीम कोर्ट से कहा कि साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी संबंधित विभाग की अनुमति के बगैर कोई भी इन्हें पेश नहीं कर सकता है। केन्द्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल ने कहा कि कोई भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज प्रकाशित नहीं कर सकता है और राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है।
वहीं, इस मामले में वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राफेल के जिन दस्तावेजों पर अटॉर्नी जनरल विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं, वे प्रकाशित हो चुके हैं और सार्वजनिक दायरे में हैं। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान कहते हैं कि जनहित अन्य चीजों से सर्वोपरि है और खुफिया एजेंसियों से संबंधित दस्तावेजों पर किसी प्रकार के विशेषाधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राफेल के अलावा ऐसा कोई अन्य रक्षा सौदा नहीं है, जिसमे कैग की रिपोर्ट में कीमतों के विवरण को संपादित किया गया। भूषण ने आगे कहा कि राफेल सौदे में सरकार-सरकार के बीच कोई करार नहीं है क्योंकि इसमें फ्रांस ने कोई संप्रभू गारंटी नहीं दी है। भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम में पत्रकारों के सूत्रों के संरक्षण के प्रावधान हैं।
इसके बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भूषण से कहा कि हम केंद्र की प्रारंभिक आपत्ति पर फैसला करने के बाद ही मामले के तथ्यों पर विचार करने वाले है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य कानून की धारा 123 और सूचना के अधिकार कानून के प्रावधानों का हवाला दिया। यह पीठ राफेल विमान सौदे के मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। यह पुनर्विचार याचिका पूर्व केंद्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दायर कर रखी है।कोर्ट की कार्रवाई पर एक नजर
वेणुगोपाल ने आरटीआई एक्ट का तर्क दिया और कहा कि सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती हैं। राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस दलील पर जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि जिन संस्थानों में ऐसा नियम है और अगर भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो जानकारी देनी ही पड़ती है। इसके बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि अगर राफेल के कागज चोरी हुए थे तो सरकार ने एफआरआई दर्ज क्यों नहीं कराई। सरकार अपनी जरूरतों के अनुसार इन दस्तावेजों का खुलासा करती रही है। कैग रिपोर्ट में क्या होगा, इसकी जानकारी सरकार को कैसे पता। प्रशांत भूषण ने न्यायालय से कहा कि राफेल के जिन दस्तावेजों पर अटार्नी जनरल विशेषाधिकार का दावा कर रहे हैं, वे प्रकाशित हो चुके हैं और सार्वजनिक दायरे में हैं। भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम में पत्रकारों के सूत्रों के संरक्षण के प्रावधान हैं। भूषण ने कहा कि राफेल सौदे में सरकार और सरकार के बीच कोई करार नहीं है क्योंकि इसमें फ्रांस ने कोई संप्रभू गारंटी नहीं दी है। यह पीठ राफेल विमान सौदे के मामले में अपने फैसले पर पुर्निवचार के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। ये पुर्निवचार याचिका पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दायर कर रखी हैं। बुधवार को रक्षा मंत्रालय ने राफेल पर हलफनामा दायार किया था।