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निगम पार्षद हिमांशु लव ने दिया शमशान घाट को लेकर सुझाव

कहा हिण्डन मोक्ष स्थल पर हो पानीपत मॉडल लागू
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। हिण्डन मोक्ष स्थली को लेकर भाजपा के एक हिमांशु ने लकड़ी को लेकर मोर्चा खोला है तो भाजपा के ही दूसरे हिमांशु ने सुझाव के साथ आगे आकर जवाब दिया है। हिण्डन मोक्ष स्थली तट पर लकड़ी के रेट से लेकर विद्युत शवदाह गृह को लेकर बवाल मचा है। भाजपा के पार्षद हिमांशु लव ने पहले ही कहा था कि नगर निगम ने हिण्डन शमशान घाट पर कोई विकास नहीं कराया है। यहां पर मृतकों के दाह संस्कार के लिए प्लेटफार्म भी रोटरी क्लब और लॉयंस क्लब ने बनवाये हैं। उन्होंने यहां विद्युत शवदाह गृह को सुचारू रूप से चलाने की बात भी कही थी। उन्होंने कहा था कि यह समय ऐसे मुद्दे उठाने का नहीं है। एक बार फिर निगम पार्षद हिमांशु लव हिण्डन शमशान स्थल को लेकर आगे आये हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर पानीपत मॉडल लागू किया जाना चाहिए। करंट क्राइम से बातचीत में नया आईडिया लाने वाले पार्षद हिमांशु लव ने कहा कि पानीपत में जिस तरह से मोक्ष स्थल तट पर व्यवस्था बनाई गयी है उसी मॉडल को गाजियाबाद में भी लागू किया जाना चाहिए। यदि वहां का मॉडल यहां लागू होगा तो सारा विवाद ही खत्म हो जायेगा। हिमांशु लव ने कहा कि पानीपत में बहुत साफ-सफाई है और उसके मुकाबले गाजियाबाद में तो बहुत सुधार की आवश्यकता है। यदि यहां पर ऐसा सिस्टम हो जाये तो सारा विवाद ही खत्म हो जायेगा।

पानीपत मॉडल में सबके सामने जमा होता है ट्रस्ट में पैसा


हिमांशु लव जिस पानीपत मॉडल की बात कर रहे हैं। वह मॉडल क्या है और उस मॉडल से कैसे विवाद दूर हो सकता है। यह उसका सिस्टम बताता है। पानीपत में जब शमशान घाट पर कोई दाह संस्कार के लिए पहुंचता है तो वहां पहुंचे लोग लकड़ी अपने साथ लेकर आते हैं। इस लकड़ी की कोई तौल नहीं होती है और ना ही किसी प्रकार का शव पूजन या अन्य चार्ज लिया जाता है। वहां पर मौजूद शमशान का डोम दाह संस्कार होने के बाद वहां मौजूद लोगों के सामने झोली फैलाकर जाता है और दाह संस्कार में शामिल लोग अपनी इच्छा और श्रद्धा से झोली में 10,20,50 या 100 का नोट डाल देते हैं। जब यह क्रिया पूरी हो जाती है तो फिर शमशान का डोम सबके सामने उन पैसों को गिनता है और वो पैसे सभी के सामने ट्रस्ट में जमा कर दिए जाते हैं। जमा धनराशि की रसीद काटकर दे दी जाती है। कम या ज्यादा का तो कोई विवाद ही नहीं है। वहां पर ना तो लकड़ी की मात्रा निर्धारित है कि इतने कुन्तल देनी ही पड़ेगी और ना ही लकड़ी का रेट 900 रूपये कुंतल है। अन्य कोई चार्ज भी नहीं लिए जाते हैं। ट्रस्ट के हाथ में कमान दी गयी है। हिमांशु लव का कहना है कि यदि गाजियाबाद में भी पानीपत मॉडल लागू कर दिया जाये और यहां भी ऐसा सिस्टम बनाया जाये तो दाह संस्कार को लेकर कोई विवाद ही नहीं होगा।

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