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चीन से भी नौ माह पहले स्पेन में पाया गया था कोरोना वायरस: स्टडी

बार्सिलोना। स्पेन के बार्सिलोना यूनवर्सिटी के वायरस पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने अपने एक शोध में दावा किया है कि कोविड-19 वायरस सबसे पहले चीन के वुहान में नहीं मिला था। उनके दावे के अनुसार कोरोना वायरस सबसे पहले स्पेन में मिला था। वैज्ञानिकों का कहना है कि स्पेन के सीवेज के पानी में इस वायरस की मौजूदगी मार्च 2019 मे पाई गई थी। चीन के वुहान में इस अवधि के नौ महीने बाद यानि दिसंबर 2019 में कोरोना वायरस की मौजूदगी पाई गई।

चीन के विशेषज्ञों ने बताया कि स्पेन में पिछले साल के मार्च में कोरोना वायरस पाए गए, वैसे ही इटली में भी इस तरह की पड़ताल सामने आई है। जाहिर है कि इस दावे से कोविड-19 वायरस की उत्पत्ति स्थान को लेकर चल रही बहस में एक नया मोड़ दे दिया है। बार्सिलोना यूनवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि बार्सिलोना में मार्च 2019 में सीवेज वॉटर में कोरोना वायरस के नमूने पाए गए और दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में कोविड-19 के किसी भी मामले की जानकारी सामने आने से पहले ही यहां कोरोना वायरस का संक्रमण मौजूद था।

शोध में कहा गया कि 12 मार्च 2019 को कोरोना वायरस का संक्रमण पाया गया है। बार्सिलोना यूनवर्सिटी द्वारा प्रकाशित किए गए अध्ययन सार्स-कोविड-2 में यह दावा किया गया है कि बेकार पानी के नमूनों में वायरस पाए गए हैं। यह अध्ययन करने के लिए स्पेन के विभिन्न शहरों से जनवरी 2018 से दिसंबर 2019 के बीच अलग-अलग तारीख पर जमे हुए बेकार जल के नमूने लिए गए। इन नमूनों के विश्लेषण से पता लगा कि एक नमूने को छोड़कर बाकी सभी नमूनों में कोविड-19 वायरस की मौजूदगी नहीं पाई गई। एक नमूने में निम्न स्तर पर कोरोना वायरस का जीन मिला, वह नमूना 12 मार्च 2019 को लिया गया था। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि किसी वैज्ञानिक अध्ययन के प्रकाशन में आने से पूर्व शोध की समीक्षा की जाती है। हालांकि इसकी अभी तक समीक्षा नहीं की गई है। स्पेन में आधिकारिक रूप से कोरोना का पहला केस फरवरी में आया लेकिन एक अन्य पूर्व अध्ययन का दावा है कि यहां मध्य जनवरी में सीवर के पानी में कोविड वायरस मिला।

स्पेनिश सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ एंड सैनिटरी एडमिनिस्ट्रेशन के डॉ. जोन रेमन विल्लिबी का कहना है कि ऐसा नहीं हो सकता कि बार्सिलोना के सीवेज वॉटर में कोरोनावायरस सिर्फ एक बार आया हो। हमें स्पेन में वायरस की पहले से मौजूदगी को समझने के लिए और अधिक नमूनों और डाटा के जरिए अनुसंधान करना होगा। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि स्पेन में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से कुछ महीने पहले ऐसे मामले सामने आए जो इन्फ्लूएंजा के लक्षण नहीं थे पर उन्हें इन्फ्लूएंजा समझ लिया गया था। वे मामले असल में कोविड-19 के लक्षण वाले मरीजों के हो सकते हैं।

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