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प्रवासी बन ना जाये कही कोरोना विस्फोट

अरूण वर्मा (करंट क्राइम)
मोदीनगर । कोरोना संक्रमण भय व लॉकडाउन के दरम्यान अपने घरों पर जाने की जिद् के चलते जंहा भी प्रवासी फंसे हैं, उन सभी को घर पहुंचने से पहले थर्मल स्क्रैनिंग के टेस्ट में पास होना जरूरी है। शरीर का तापमान अधिक पाए जाने पर उन्हें वहीं रोक दिया जाता है और क्वारंटाइन कर दिया जाता है। मगर प्रवासियों ने इससे बचने का ऐसा तरीका खोज निकाला है, जो देश भर में कोरोना के विस्फोट का बड़ा कारण बन सकता है।
ड्रग विभाग की जानकारी में यह बात सामने आई है कि थर्मल स्क्रैनर को छकाने के लिए कुछ प्रवासी लोग क्रोसिन, पैरासिटामॉल की गोलियों का सहारा ले रहे हैं। ताकि उनका वास्तविक तापमान इसकी पकड़ में न आए और वह किसी तरह अपने गृह जनपद पहुंच सकें। विभिन्न स्थानों से इस तरह की सूचनाएं मिलने पर इसकी विक्री को नियंत्रित करने के लिए ड्रग विभाग की ओर से हाल ही में एक सर्कुलर भी जारी किया गया है। जिसके तहत ई-पोर्टल पर पैरासिटामॉल खरीदने वालों का नाम, पता व मोबाइल नंबर दर्ज करना जरूरी कर दिया है। ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें ट्रेस किया जा सके।
चार से छह घंटे तक रहता है असर
प्रियदर्शी नर्सिंगहोम के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ0 सतीश त्यागी कहते हैं कि पैरासिटामॉल खाने पर यह बढ़े हुए तापमान को सामान्य कर देता है। अगर कोई व्यक्ति साधारण बुखार से पीड़ित है, तो उसमें इसका असर चार से छह घंटे व कभी-कभी आठ घंटे तक भी रह सकता है।
ऐसी स्थिति में थर्मल स्क्रैनर से जांच करने पर शरीर के वास्तविक तापमान का पता नहीं चल पाता। इसलिए जिनका तापमान सामान्य है, उन्हें भी 14 दिन का क्वारंटाइन जरूरी है।
क्रोसिन की बढ़ी बिक्री
मोदीनगर के कई केमिस्टों से जब इस संबन्ध में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि अन्य दिनों की अपेक्षा अचानक पैरासिटामॉल की मांग बढ़ी है।
हम लोगों के संज्ञान में भी यह बात आई है। इस बारे में हमें ड्रग विभाग से निर्देंश भी प्राप्त हुआ है। तब से इसकी विक्री का आॅनलाइन रिकॉर्ड ई-पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। मगर सरकार को चाहिए कि सभी प्रवासियों की कोंविड जांच अनिवार्य करे। सिर्फ थर्मल स्क्रैनिंग संक्रमण रोकने का विकल्प नहीं है।
तीन हजार मामले ट्रेस
सूत्रों का कहना है कि जपनद गाजियाबाद में पैरासिटामॉल का इस्तेमाल करके इस तरह का प्रयास करने के मामले संज्ञान में आ चुके है। इसलिए एक सर्कुलर जारी कर सभी केमिस्टों को ई-पोर्टल पर खरीदारों का ब्यौरा रखने को कहा गया है। इसके तहत करीब दर्जनों मामले भी ट्रेस किए गए हैं। किसी भी मरीज का रिकॉर्ड लिए बगैर उसे यह दवा नहीं दी जा रही।

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