पारा शिक्षकों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा /छग की तर्ज पर सेवा स्थायीकरण कर वेतनमान देने की मांग

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रांची, (ईएमएस)। कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम के नेतृत्व में झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी का एक प्रतिनिधिमंडल पारा शिक्षकों की समस्याओं को लेकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से राजभवन में मिलकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि 15 वर्ष के लंबे समय से राज्य के 67,000 पारा शिक्षक आंदोलनरत है लेकिन आज भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं लेकिन न्यूनत्तम मजदूरी को भी तरस रहे हैं, यह राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। कई राज्य जैसे- बिहार, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश एवं छतीसगढ़ में पारा शिक्षकों का स्थायीकरण किया गया है। इस बाबत शिक्षकों की सेवा स्थायीकरण करने सहित उनके मांगों के अध्ययन तथा सुझाव के लिए अपर मुख्य सचिव, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राज्यभाषा विभाग की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन मई 2018 में किया था। उच्चस्तरीय समिति ने छतीसगढ़, उडीसा, मध्यप्रदेश, उतरप्रदेश राज्यों का भ्रमण कर अक्टूबर 2018 में अध्ययन पूरा तो कर लिया परन्तु अभी तक अपना प्रतिवेदन नहीं दिया है। जिसके कारण पारा शिक्षकों की सेवा स्थायीकरण करने की प्रक्रिया लंबित है।
राज्य के सभी पारा शिक्षक सेवा स्थायीकरण को लेकर 15 नवम्बर 2018 से हड़ताल पर हैं। 15 नवम्बर 2018 से प्रारंभ आंदोलन के क्रम में पूरे राज्य में अब तक दस पारा शिक्षक साथी शहीद हो चुके है और एक पारा शिक्षक अभी भी लापता हैं। यहां तक की सरकार ने 282 शिक्षकों को होटवार जेल भेजने का काम किया। जो काफी निन्दनीय एवं दुःखद है।
एक और पहलू की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना जरूरी है कि वर्तमान में पारा शिक्षकों को न्यूनत्तम 8400 रूपये एवं अधिकत्तम 10164 रूपया मानदेय के रूप में दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शराब बेचने वाली राज्य सरकार अपने सेल्समैन को 18000 एवं दुकान के मैनेजर को 25000 हजार वेतनमान दे रही है। यह सरकार की प्राथमिकता को दर्शाने के लिए काफी है।
पार्टी की ओर से राज्यपाल का एक अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु पर आकृष्ट करते हुए बताया गया कि पिछले 13 दिसम्बर को खूंटी के पत्थलगड़ी की रिपोर्ट करने वाले ग्रामीण पत्रकार अमित टोप्पनो की हत्या ने झारखंड को झकझौर कर रख दिया। यह केवल चौथे स्तम्भ पर हमला नहीं था बल्कि गांव से राजधानी तक खबर पहुंचाने वाले एक सजग प्रहरी की नृशंस हत्या थी। हत्यारे अब तक गिरफ्त से बाहर हैं और सरकार खामोश हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमिटी मांग करती है कि राज्य के पारा शिक्षकों को छतीसगढ़ के तर्ज पर सेवा स्थायीकरण करते हुए वेतनमान दिया जाए, समान काम का समान वेतन मिले (यानी पारा शिक्षकों को भी सरकारी शिक्षकों के समान वेतन दिया जाए), स्कूलों की समायोजन की प्रक्रिया जो चल रही है उसे रोका जाए, शहीद हुए दस शिक्षकों के परिजनों को 25 लाख रूपया मुआवजा एवं एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिया जाए एवं अतिम टोप्पनों की नृशंस हत्या की उच्चस्तरीय जांच करायी जाए, उनके पजिनों को 25 लाख रूपया मुआवजा तथा एक सदस्य को नौकरी दिया जाय।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, विधायक सुखदेव भगत, डा0 इरफान अंसारी, बादल पत्रलेख, गीता कोड़ा, निर्मला देवी, देवेन्द्र सिंह बिट्टू, प्रदेश पदाधिकारियों में राजेश ठाकुर, राजीव रंजन प्रसाद, आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव, डा0 राजेश गुप्ता छोटू, एम. तौसिफ एवं जगदीश साहू शामिल थे।