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जिला प्रशासन, पुलिस से लेकर सिविल डिफेंस तक को बधाई

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। जिस कांवड़ यात्रा के दौरान अन्य जिलों में मारपीट, उपद्रव और जनता को परेशानी की खबरें सुनाई देती हैं। उस कांवड़ यात्रा में गाजियाबाद जिले का प्रशासन, यहां के पुलिस अधिकारी, सिविल डिफेंस के चीफ वॉर्डन, समाजसेवी संस्थाएं और यहां की जनता बधाई की पात्र है कि कांवड़ यात्रा सकुशल संपन्न हुई और पूरे जिले में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। यह यात्रा गाजियाबाद के लिए इसलिए भी अहम है कि यहां मुख्य कांवड़ मार्ग मुरादनगर से शुरू होकर साहिबाबाद यूपी बॉर्डर तक जाता है और मुरादनगर से गाजियाबाद के मार्ग में आठ मस्जिद पड़तीं हैं। सबसे बड़ा शिवालय श्री दूधेश्वरनाथ मठ मंदिर है और यह मुस्लिम बाहुल्य बस्ती के बीच बसा है। लेकिन यहां की जनता यहां के सिविल डिफेंस कार्यकर्ता और यहां का प्रशासन इस मामले में सौभाग्यशाली है कि वह अपने यहां की महा कांवड़ यात्रा को अपने इंतजाम से कामयाब करता है। इस बार लगभग 7 दिन चली कांवड़ यात्रा में सबकुछ सकुशल रहा। सोशल मीडिया भी संभला हुआ और सहज नजर आया। जहां तक बात शहर की है तो यहां के लोगों ने अपनी समरसता और सामंजस्य बैठाने वाली प्रकृति का परिचय देते हुए शहर को एक शानदार तोहफा दिया।
निस्वार्थ सहयोगी बने समाजसेवियों का भी अहम योगदान
जिस कांवड़ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन टेंशन में आ जाता है, उस कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने में प्रशासन और पुलिस के साथ सबसे बड़ी भूमिका समाजसेवियों की भी
रहती है। यह समाजसेवी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के दायित्व को निभाने के लिए निस्वार्थ भाव से आगे आते हैं।
सहयोग करते हैं। दिन-रात ड्यूटी की तरह जिम्मेदारी को संभालते हैं। कांवड़ यात्रियों का सम्मान करते हैं। अधिकारियों से लेकर सामाजिक हस्तियों का मान-सम्मान करते हैं और प्रशासन तथा कांवड़ यात्रा के बीच सहयोग का एक सेतु बनते हैं।
मेयर आशा शर्मा और नगरायुक्त ने भी संभाला बखूबी मोर्चा

कांवड़ यात्रा के दौरान सफाई व्यवस्था एक बड़ी चुनौती रहती है। लेकिन इस बार यह चुनौती खत्म कर दी मेयर आशा शर्मा और नगरायुक्त सीपी सिंह ने। नगरायुक्त सीपी सिंह स्वच्छता को लेकर पूरी तरह सजग दिखाई दिए और निगम की टीमें उनके निर्देशन में काम करती रहीं। मेयर आशा शर्मा ने स्वच्छता से लेकर सामाजिकता तक दिखाया कि मेयर कैसा होना चाहिए। वह पूरी तरह एक्टिव रहीं और स्वच्छता से लेकर व्यवस्था तक उनका निर्देशन चलता रहा।
डीएम रितु माहेश्वरी का मैनेजमेंट लाजवाब

डीएम रितु माहेश्वरी को कुशल प्रशासक की संज्ञा दी जा सकती है। उन्होंने कांवड़ यात्रा से पहले ही विभिन्न विभागों के अधिकारियों की ड्यूटी सेक्टर मजिस्ट्रेट से लेकर जोन प्रभारी तक लगाई। ड्यूटी का चार्ट इस तरह से बनाया गया कि 24 घंटे प्रशासन के अधिकारी अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहे। मंदिर से लेकर सड़क तक और पूरे कांवड़ मार्ग पर व्यवस्था का एक अलग ही रूप नजर आया। कहीं किसी को कोई परेशानी नहीं होने दी और कहीं किसी प्रकार की अव्यवस्था का सीन ही नहीं बनने दिया। डीएम रितु माहेश्वरी ने साबित किया कि जिले की कमान उनके हाथों में पूरी तरह सेफ है।
एसएसपी की नीति रही हिट
कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पुलिस प्रशासन के सामने होती है। कानून-व्यवस्था से लेकर यातायात व्यवस्था तक पुलिस प्रशासन को अपने सीमित संसाधनों के बूते संभालनी होती है। लेकिन कांवड़ यात्रा में एसएसपी वैभव कृष्ण और एसपी सिटी आकाश तोमर ने सोशल भागीदारी और पुलिस की जिम्मेदारी का ऐसा सेतु बनाया कि शहर उनकी तारीफ कर रहा है। एसएसपी वैभव कृष्ण जहां पुलिस व्यवस्था को लेकर सजग थे। वहीं युवा आईपीएस अधिकारी आकाश तोमर ने एक नई व्यवस्था शुरू की और उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए सिटीजन वॉलंटियर फोर्स बनाई। आकाश तोमर को जबरदस्त समर्थन मिला और इस फोर्स ने पुलिस का एक बड़ा साथ निभाया। सोशल भागीदारी का यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा। वहीं दूधेश्वरनाथ मंदिर के महंत से लेकर परिसर तक पुलिस ने अपनी सुरक्षा का घेरा बनाया। एएसपी मनीषा सिंह ने व्यवस्था संभालने में पूरी मुस्तैदी दिखाई और पुलिस ने यहां दिन-रात राउंड द क्लॉक काम किया और काम बोल रहा है। कहीं किसी को यातायात की दिक्कत नहीं हुई और कहीं कोई मारपीट की भी वारदात नहीं हुई।
महंत नारायण गिरी से लेकर मुस्लिम समाज का सहयोग

महानगर के प्राचीन शिवालय श्री दूधेश्वरनाथ मठ मंदिर पर सबसे अधिक कांवड़िये जलाभिषेक करते हैं। यहां के महंत नारायण गिरी की प्रबंधन क्षमता का भी लोहा मानना होगा। उन्होंने मंदिर समिति के स्वयंसेवकों के जरिये व्यवस्था का एक पूरा माहौल बनाया। वहीं सबसे बड़ी तारीफ शहर के मुस्लिम समाज के लोगों की करनी होगी। एक-दूसरे के धर्म का सम्मान और एहतराम किसे कहते हैं यह कोई गाजियाबाद के मुस्लिमों से सीखे। कांवड़ियों की सेवा में सबसे आगे और व्यवस्था बनाने में सबसे आगे मुस्लिम समाज के लोग रहे। सेवा भावना और शहर की अमन-शांति का जिम्मा जिस तरह से मुस्लिम समाज के लोगों ने उठाया उसके लिए वह भी बधाई के पात्र हैं।

सिविल डिफेंस आया व्यवस्था में नंबर वन

सिविल डिफेंस के चीफ वॉर्डन ललित जायसवाल शासन और प्रशासन के हर काम में सहयोग वाले हाथ के साथ आगे आते हैं। उनका व्यवहार ऐसा है कि सिविल डिफेंस के सभी वॉर्डन उनके सहयोग में साथ आते हैं। इस बार भी सिविल डिफेंस ने कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था में अपना शानदार रोल अदा किया। सिविल डिफेंस के वॉर्डन हर कदम पर व्यवस्था बना रहे थे। कांवड़ियों को दिक्कत न हो इसका ध्यान रखा और जनता को परेशानी न हो यह भी उनकी पहली प्राथमिकता रही। प्रशासन के साथ जब एक बड़े सहयोगी के रूप में सिविल डिफेंस जैसा बड़ा संगठन साथ आकर खड़ा हो गया तो फिर व्यवस्था अपने आप बनी। सिविल डिफेंस के चीफ वॉर्डन ललित जायसवाल और उनकी पूरी टीम इस सफलता पर बधाई की हकदार है।

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