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सीएम केजरीवाल ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना की फाइल को मंजूरी के लिए एलजी के पास दोबारा भेजी

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना की फाइल को मंजूरी के लिए एक बार फिर एलजी के पास भेजी है। सीएम ने एलजी की आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा है कि राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना कानून के मुताबिक है और यह योजना केंद्र सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए लागू की गई। करोना काल में इस योजना को रोकना गलत है। इसे लागू कर राशन की दुकानों पर लगने वाली भीड़ से बचा जा सकता है। सीएम ने कहा है कि पिछले तीन साल में चार बार एलजी को राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना को लेकर कैबिनेट के निर्णय की जानकारी दी गई, लेकिन उन्होंने कभी इसका विरोध नहीं किया। बीते फरवरी माह में इस योजना को लागू करने के लिए नोटिफिकेशन किया गया, तभी भी एलजी ने विरोध नहीं किया। हमने केंद्र सरकार की सभी आपत्तियों को दूर किया और हाईकोर्ट ने अपनी पांच बार की सुनवाई के दौरान इस पर स्टे नहीं लगाया। साथ ही, कोर्ट केस के दौरान केंद्र सरकार ने कभी किसी अनुमोदन के बारे में नहीं बताया, फिर इस योजना को क्यों रोका जा रहा है? सीएम केजरीवाल ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी की फाइन एलजी के पास दोबारा भेजते हुए उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का भी जवाब दिया है। सीएम ने कहा है कि मैंने उपराज्यपाल के नोट का अध्ययन किया है। जिसमें एक गंभीर गलतफहमी प्रतीत होती है। एलजी के समक्ष तात्कालिक मामला राशन की डोरस्टेप डिलीवरी स्कीम को मंजूरी नहीं है। यह योजना पहले ही अंतिम रूप ले चुकी है।

सीएम ने कहा है कि मंत्री परिषद ने 06 मार्च 2018 के कैबिनेट निर्णय के माध्यम से लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के तहत लाभार्थियों के घर पर राशन (गेहूं के बदले पूरा आटा, चावल और चीनी) पहुंचाने की योजना को मंजूरी दी थी। दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (डीएससीएससी) को परियोजना के लिए एकल कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में अनुमोदित किया गया था और 677 करोड़ रुपए परियोजना पर परिव्यय के रूप में मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट के इस निर्णय के बारे में एलजी कार्यालय को सूचित किया था और एलजी द्वारा योजना को लेकर कोई विरोध नहीं किया गया। कैबिनेट ने 21 जुलाई 2020 को योजना में कुछ संशोधनों को मंजूरी दी और योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ (एमएमजीजीआरवाई) रखने का निर्णय लिया। साथ ही, कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ (ओएनओआरसी) के कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए सभी एफपीएस में ई-पीओएस उपकरण लगाए जाएंगे और ई-पीओएस, एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड और ‘मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना’ को एक साथ लागू किया जाएगा। कैबिनेट के इस फैसले को एलजी कार्यालय में भी भेजा गया था और कोई आपत्ति नहीं जताई गई। इसके अलावा, कैबिनेट ने 09 अक्टूबर 2020 को योजना को कार्यान्वयन संबधी पहलुओं पर निर्णय लिया और दो चरणों में इसके कार्यान्वयन को मंजूरी दी। कैबिनेट के इस निर्णय के बारे में उपराज्यपाल के कार्यालय को भी जानकारी दी गई और एलजी द्वारा योजना के कार्यान्वयन के इस निर्णय पर कोई आपत्ति नहीं व्यक्त किया गया। इसके बाद, दिल्ली सरकार ने 15 अक्टूबर 2020 और 19 अक्टूबर 2020 को निविदाएं जारी की और योजना के कार्यान्वयन के लिए तैयारी शुरू कर दी। इसके अलावा, इस योजना को 20 फरवरी 2021 को अधिसूचित किया गया। इस नोटिफिकेशन की एक कॉपी एलजी को भेजी गई थी। 04 जुलाई 2018 को दिए उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार, एलजी के पास उक्त योजना/अधिसूचना पर अपनी आपत्ति जताने का एक और मौका था, लेकिन एलजी ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसलिए यह योजना पहले ही अंतिम रूप ले चुकी है।

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