इमली के बीज में छिपा है चिकनगुनिया का इलाज: आईआईटी वैज्ञानिक

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रुड़की (ईएमएस)। आईआईटी रुड़की के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिकों की टीम ने एक शोध में पता लगाया है कि दिल्ली के बीज में चिकनगुनिया का इलाज छिपा हुआ है। टीम ने इमली के बीज में उपलब्ध लेक्टिन प्रोटीन से चिकनगुनिया वायरस को मारने में सफलता प्राप्त की है। शोध में सफलता पाने के बाद अब टीम का लक्ष्य चिकनगुनिया से बचने के लिए दवाई तैयार करना है। गौरतलब है कि चिकनगुनिया भी डेंगू की तरह हर साल फेल रहा है, जिससे कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। भाषा में अभी तक चिकनगुनिया से बचाव के लिए कोई दवाई उपलब्ध नहीं है। इस पर हरिद्वार में आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर प्रविंद्र कुमार ने बताया कि फिलहाल टीम और काम कर रही है। उन्होंने बताया कि मनुष्य के शरीर में इस प्रोटीन को कैप्सूल या इंजेक्शन के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। यदि वह इस कार्य में सफल हो जाते हैं, तो इससे आम जनता को काफी फायदा मिलेगा। साथ ही यह दवाई बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होगी, जिससे चिकनगुनिया के मरीजों को फायदा भी मिलेगा और उनकी जान भी बच जाएंगी।
प्रोफेसर प्रविंद्र कुमार ने बताया कि हम लोगों ने जिस प्रोटीन की खोज की है, वह चिकनगुनिया के वायरस को मार सकता है। उन्होंने जहां भी बताया कि चिकनगुनिया के वायरस को मारने का शोध कार्य लैबोरेट्री में किया गया। अब केवल मानव शरीर पर प्रशिक्षण किया जाना बाकी है। उसने कहा कि अभी तक चिकनगुनिया के इलाज के लिए कोई भी वैक्सिन या दवाई उपलब्ध नहीं है। इसलिए बाजार में इस दवाई के आ जाने से लोगों को बहुत फायदा होगा।