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अपहरण और बलात्कार के मामले पुलिस के लिए चुनौती

संगठित अपराध हो रहा है, बेलगाम, जघन्य वारदातों में बढ़ोत्तरी
सय्यद अली मेहदी (करंट क्राइम)
गाजियाबाद । अगर बात संगठित अपराध की की जाए तो अपहरण और बलात्कार ऐसे अपराध हैं जो पीड़ित पक्ष को बुरी तरह तोड़ कर देते हैं । इन दोनों ही अपराधों को गत कुछ साल से पश्चिम उत्तर प्रदेश में सक्रिय कुख्यात गैंग अंजाम दे रहे है।कुछ वर्ष पहले बॉलीवुड में एक फिल्म रिलीज हुई थी। जिसका नाम अपहरण था। फिल्मकार प्रकाश झा ने बड़ी गहनता के साथ फिल्म बनाई थी।
फिल्म बिहार की पृष्ठभूमि पर बनाई गयी थी। जिसमें अपहरण को एक उद्योग की तरह दिखाया गया था। निश्चित रूप से हिंदी फीचर फिल्म निर्देशक की परिकल्पना थी।लेकिन पश्चिम उत्तर प्रदेश खास तौर पर हॉट सिटी गाजियाबाद में अपहरण एक अवैध कारोबार की तरह पनप रहा है। पुलिस प्रशासन को इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। वरना ऐसा ना हो कि अपहरण एक ऐसे वृक्ष के रूप में पनप कर मजबूत हो जाए। जिसकी जड़ें बहुत गहरी और पकड़ बहुत सख्त बन जाए। बढ़ती बेरोजगारी के चलते युवा वर्ग का जुर्म की दुनिया में कदम रखना कोई नई बात नहीं रह गई है। लेकिन एनसीआर में बढ़ती जरूरतें इस बात की तस्दीक है कि निश्चित रूप से कुछ ऐसा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए । आइए इस रिपोर्ट के माध्यम से हॉट सिटी गाजियाबाद के पिछले 5 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालते हैं और निष्कर्ष निकालने की कोशिश करते हैं कि क्या वाकई इस शहर को अपहरण के मामले में क्राइम कैपिटल का दर्जा पा चुका है।
आमतौर पर हम ऐसी खबरें लगभग रोज ही पड़ते हैं या देखते हैं कि कुछ लोगों ने किसी महिला या युवती के साथ बलात्कार की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया है । वही पुलिस का रवैया , पीड़िता को सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच से लेकर अदालत तक वकीलों के घिनौने सवालों का जवाब देना पड़ता है। एक बात तो साबित हो जाती है कि पीड़िता का बलात्कार शारीरिक रूप से तो शायद एक ही बार हुआ हो। लेकिन मानसिक रूप से हर रोज होता है। जब वह वकीलों से लेकर पुलिस और सरकारी डॉक्टर को उन बातों के बारे में बताती है जिन बातों के बारे में बात करने से ही किसी भी महिला या युवती को घिन्न आती है। निश्चित रूप से आज हम इंटरनेट के युग में जी रहे हैं। पश्चिमी देशों का प्रभाव हमारी संस्कृति पर तेजी से बढ़ रहा है। जहां पश्चिमी देशों में फ्री सेक्स की संस्कृति है। वही आज भी हमारे उसूल यह कहते हैं कि दुल्हन को घूंघट उठा कर ही पहली बार देखा जाता है। हमारे देश की संस्कृति शारीरिक संबंधों की स्वतंत्रता को तस्लीम नहीं करती है, और शायद ही कभी करेगी भी नहीं। ऐसे में बलात्कार है एक ऐसा अपराध है। जिसकी सजा शायद हमारा संविधान भी नहीं दे सकता। क्योंकि जो महिला या युवती इस घिनौनी वारदात का शिकार होती हैं । उसकी जिंदगी उसी पल लगभग खत्म हो जाती है । कुछ युवतियां हिम्मत करके कानून का दरवाजा खटखटाती है । तो उनको थाने से लेकर अदालत तक इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता
है, कि उनकी हिम्मत होती जवाब दे जाती है।
एक नजर इधर भी
थाना                  अपहरण                   बलात्कार
कवि नगर          5                                8
सिहानीगेट           9                              6
कोतवाली घण्टाघर 10                             12
विजयनगर           14                              18
इंदिरापुरम              8                                11
साहिबाबाद             17                              23
लिंकरोड                  7                               9
खोड़ा                         5                             6

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