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जीएसटी कलेक्शन में कमी से केंद्र एवं राज्य सरकारें परेशान

नई दिल्ली। केंद्र सरकार को जीएसटी के राजस्व में कमी होने पर राज्यों को 2021-22 तक कंपनसेशन देना था। केंद्र सरकार ने फरवरी माह में राज्यों को 15430 करोड़ रुपए जारी किए थे। इसमें अक्टूबर और नवंबर की दूसरी किस्त के रूप में यह राशि जारी की गई थी। दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च का कंपनसेशन राज्य केंद्र से मांग रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार राज्यों को यह राशि नहीं दे पा रहा है। जिसके कारण राज्यों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई है।

14 फ़ीसदी वार्षिक वृद्धि का कंपनसेशन
जीएसटी लागू करने में केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच 2015-16 को आधार वर्ष मानकर प्रतिवर्ष 14 फ़ीसदी की वृद्धि राजस्व में करने का समझौता केंद्र सरकार ने राज्यों से किया था। 2021-22 तक केंद्र सरकार को राज्यों के कर में यदि कोई कमी आती है, ऐसी स्थिति में उसे कंपनसेशन राज्यों को देना था। पिछले 1 वर्ष से यह स्थिति गड़बड़ा रही है। जिसके कारण राज्यों को समय पर जीएसटी कंपनसेशन का भुगतान नहीं हो पा रहा है।

चालू वित्त वर्ष में 20250 करोड़ रुपए का कंपनसेशन
जीएसटी कानून के तहत केंद्र सरकार को चालू वित्त वर्ष में 20250 करोड़ रुपए का कंपनसेशन राज्यों को नवंबर माह तक का देना था। आर्थिक मंदी और लॉकडाउन के कारण जीएसटी के राजस्व में भारी कमी होने से केंद्र सरकार की आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई है। जीएसटी कलेक्शन, सेस का कलेक्शन एवं अन्य मदों में भी कमी आने के कारण केंद्र सरकार की आर्थिक स्थिति भी गड़बड़ाई है। जिसके कारण केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच में कंपनसेशन को लेकर नया विवाद खड़ा होने लगा है। जिसके कारण आर्थिक और वैधानिक दोनों ही समस्याएं खड़ी हो रही है।

राज्यों को 15430 करोड़ रुपए के कंपनसेशन का भुगतान
केंद्र सरकार ने फरवरी माह में जीएसटी कंपनसेशन के रूप में अक्टूबर और नवंबर माह तक का 19950 करोड़ रुपए जारी किए थे। इसमें से केंद्र ने राज्यों को केवल 15430 करोड़ रुपए जारी किए हैं। इसके बाद की किस्त जिसमें दिसंबर से लेकर मार्च तक का भुगतान होना अभी बाकी है। लॉकडाउन के कारण राज्यों का टैक्स कलेक्शन भी पिछले दो माह में बहुत कम हुआ है। वहीं केंद्र सरकार का भी टैक्स कलेक्शन पिछले 2 माह में काफी कम हुआ है। राज्य सरकारें केंद्र पर लगातार कंपनसेशन राशि को लेकर दबाव बना रही हैं।

सभी राज्यों का राजस्व 80 से 90 फ़ीसदी तक घटा
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जो लॉकडाउन लागू किया गया है। उसके कारण पिछले दो माह में राज्यों का टैक्स कलेक्शन 80 से 90 फ़ीसदी तक घट गया है। जिसके कारण राज्यों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा कर्ज सीमा को 5 फ़ीसदी तक बढ़ाकर राज्यों को कर्ज लेने की जो सुविधा दी गई थी। उसमें भी शर्तें जोड़ देने से राज्य काफी नाराज हैं। केंद्र सरकार ने जो शर्तें लगाई हैं, उसके कारण निकट भविष्य में उन्हें कर्ज भी नहीं मिल सकता है। जिसके कारण राज्यों ने एक बार फिर केंद्र पर जीएसटी कंपनसेशन राशि का भुगतान तथा अतिरिक्त पैकेज की मांग का दबाव बनाया है। देखना यह है केंद्र सरकार किस तरह इस वित्तीय मामले में राज्यों की मदद कर पाती है।

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