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मुस्लिम बस्तियों में सपा सदस्यता अभियान को लेकर बूम

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गाजियाबाद। समाजवादी पार्टी चुनाव हारने के बाद फिर से पूरी ताकत के साथ जनता की अदालत में उतरने को तैयार है। सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने समीक्षा बैठक में साफ भी कर दिया कि सपा अब सदस्यता अभियान के जरिये अपनी पकड़ जनता में बनायेगी। सपा खेमे में चुनाव लड़ने के लिए सफलता का पैमाना भी सदस्यता अभियान को माना गया है। सपा में इन दिनों सदस्यता अभियान चल रहा है। खास बात यह है कि सपा के सदस्यता अभियान को मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सफलता मिल रही है। कैलाभट्टा, शहीदनगर, पसौंडा, मिर्जापुर, मुरादनगर सहित कई ऐसे इलाके हैं जहां सपा को लेकर मुस्लिमों का रूख सकारात्मक है। इन बस्तियों में सपा के सदस्यता अभियान में पब्लिक का रूझान दिख रहा है। यहां साईकिल की सदस्यता लेने के लिए लोग खुद आगे आ रहे हैं। यह बात भाजपा के लिए तो ठीक है लेकिन बसपा के लिए खतरे की घंटी है। मुस्लिमों का एक तरफ रूझान होना भाजपा को धुव्रीकरण का लाभ देता है। लेकिन दलित मुस्लिम समीकरण के सहारे निगम चुनाव में उतरने को तैयार बसपा के हाथी के लिए यह स्थिति सियासी लिहाज से मुनाफे का सौदा नहीं है। बसपा पहली बार सिम्बल पर चुनाव मैदान में उतरेगी। उसके सामने अपने दलित वोट बैंक को बिखरने से बचाने की चुनौती है। दूसरी चुनौती अब मुस्लिम वोट बैंक को सपा खेमे में जाने से रोकने की हो गई है। योगी सरकार के बाद जिस तरह से माहौल बना उससे मुस्लिमों को लगने लगा है कि उनकी अपनी पार्टी समाजवादी ही है जिसे अपना दल कह सकते हैं। बसपा ने भले ही मुस्लिमों को टिकट दिए हो लेकिन बसपा अब मुस्लिम खेमे से दूर हो रही है। सपा सदस्यता अभियान चलाकर मुस्लिम बस्तियों में वो पकड़ बना चुकी है जो उसे वार्ड चुनाव में मजबूती देगी।
सपा के सदस्यता अभियान में मुस्लिमों का झुकाव साफतौर पर देखने को मिल रहा है। कई बार सदस्यता कैम्प में स्वयं मुस्लिम पहुंच रहे हैं और अपने साथ अन्य को भी सदस्यता ग्रहण करा रहे हैं। मुस्लिमों के बढ़ते रूझान को देखकर खुद सपाई खासे गद्गद नजर आ रहे हैं। सपा का यह सदस्यता अभियान जरूर बसपा और कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बनता जा रहा है।

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