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किस बिन्दु संख्या 3 को लेकर है अनदेखी पर भाजपा जनप्रतिनिधि नाराज

मंगलवार को बैठक कर बनाई मुख्यमंत्री से शिकायत करने की भूमिका
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कोरोना काल चल रहा है और ऐसे में सरकार जहां अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित कर रही है। वहीं सरकार के जनप्रतिनिधि भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मगर सूत्र बताते हैं कि एक बार फिर से किसी जिम्मेदारी को लेकर सूत्र सरकारी विभाग बनाम सरकार के जनप्रतिनिधि हो गया है। सरकार के जनप्रतिनिधियों ने सरकार द्वारा भेजे गये कार्यक्रम को लेकर सरकारी अधिकारीके रवैया पर नाराजगी जताई है।

सूत्र बताते हैं कि मामला उस शासनादेश से जुड़ा है जो लॉकडाउन में काम करने से सम्बंधित है। इसमें कोरोना कंट्रोल से लेकर स्वच्छता अभियान और पीने के पानी की व्यवस्था से लेकर कई अन्य चीजों के निरीक्षण से जुड़े मामले हैं। सूत्र बताते हैं कि कोविड 19 को लेकर जो काम होना था उसमें यह था कि सरकार के अधिकारी गांव-देहात में जायेंगे। नगर पालिका, नगर पंचायत का भ्रमण करेंगे। बड़े अधिकारी के साथ-साथ इस काम में जनप्रतिनिधियों को भी साथ लिया जाना था। सूत्र बताते हैं कि 10,11 और 12 जुलाई को यह काम होना था। इनमें पांच बिन्दुओं को लेकर बिन्दु नम्बर 3 पर पेंच फंस गया। बिन्दु नम्बर 2 में कहा गया था कि अधिकारी अपने जिले में स्वच्छता अभियान से लेकर फॉगिंग, स्वच्छ पेयजल, जलभराव और संचारी रोग नियंत्रण आदि की समीक्षा करेंगे। बिन्दु नम्बर चार मे यह बताया गया था कि अधिकारी को जिले में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के किसी एक अथवा एक से अधिक वार्ड का निरीक्षण करना है और कम से कम एक गांव का भी निरीक्षण होना था। गांव में साफ-सफाई, संचारी रोग नियंत्रण तथा स्वच्छता अभियान के लिए जनता को प्रेरित करना था। बिन्दु नम्बर पांच में शहरी क्षेत्रों की मलिन बस्तियों का निरीक्षण होना था और यहां भी कई काम होने थे।

सूत्र बताते हैं कि अधिकारी को नौ बजे पहुंचना था और उसके बाद तीन दिन यह काम होने थे। बिन्दु नम्बर दो भी ठीक रहा और चार और पांच भी ठीक रहा लेकिन बताया जाता है कि बिन्दु नम्बर तीन में चूक हो गयी और इस बात ने तूल पकड़ लिया है। क्योंकि शासनादेश में स्पष्ट लिखा है कि बिन्दु नम्बर तीन के तहत जब प्रशासनिक अधिकारी भ्रमण करेंगे तो वह क्षेत्रके जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे और उन से फीडबैक लेकर समस्या का समाधान करेंगे। बताते हैं कि यहां पर मिस्टेक हो गयी और रिटेक का मौका नहीं मिला। जनप्रतिनिधियों ने इस चूक को गंभीर लिया है। बताया जाता है कि अधिकारी तो जिले में आये मगर यहां पर जनप्रतिनिधि इग्नोर हो गये। जन प्रतिनिधियों और अधिकारी की कोई बैठक ही नहीं हो पाई। कई से मुलाकात हुई और कई से मुलाकात नहीं हो पाई। सूत्र बताते हैं कि भाजपा के बड़े जनप्रतिनिधियों ने इसे मुद्दा बना लिया है।

जनप्रतिनिधि का ही कहना है कि यदि अधिकारी हमें साथ लेते और हम से बात करते तो हमें पता है कि हमारे क्षेत्र में कहां पर समस्या है और कहां पर समस्या नहीं है। यदि अधिकारी हम से मुलाकात करते तो हम बात भी रखते और उन्हें बताते। सूत्र बताते हैं कि जनप्रतिनिधियों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि जो कार्यक्रम शासन से तय होकर आया है उस कार्यक्रम मे अधिकारियों ने किस आधार पर जनप्रतिनिधियों की बैठक को इग्नोर कर दिया। सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को ही एक जनप्रतिनिधि के घर पर बैठक हुई और इस बैठक में तय हुआ कि इस अनदेखी की शिकायत दर्ज कराई जायेगी। बाकायदा एक लेटर तैयार हुआ है जो जनप्रतिनिधियो के हस्ताक्षर से लेस होकर मुख्यमंत्री के पास पहुंच रहा है। इस लेटर में बिन्दु नम्बर तीन को ही मुख्य आधार बनाया गया है। जिस जनप्रतिनिधि के घर पर यह बैठक हुई है उनकी लोकेशन मुरादनगर विधानसभा की बताई जाती है। बताया ये जाता है कि जनप्रतिनिधि इस बात से बेहद नाराज हैं कि जो नीति शासन से तैयार होकर आई है उस नीति में भी अधिकारी क्यों जनप्रतिनिधियों को इग्नोर कर रहे हैं। जिले का मामला था तो यहां जनप्रतिनिधि बेहतर सुझाव दे सकते थे। लेकिन अधिकारियों ने ही बेहद सफाई से जनप्रतिनिधियों को अलग कर दिया।

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