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जांच में फंसे सिपाही की सिफारिश में पहुंचे भाजपा नेता

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। जब योगी सरकार सत्ता में आई तो सबसे पहले थानों को लेकर फरमान भाजपाइयों के लिए ही जारी हुआ। भाजपाइयों के लिए नियम आ गया कि कोई भी भाजपा कार्यकर्ता थाने या तहसील में किसी की सिफारिश के लिए नहीं जाएगा। यदि वह जाएगा तो स्थानीय संगठन को सूचना देगा। इसके बाद यह भी अंदरखाने आदेश जारी हुए कि कोई भी भाजपा नेता किसी भी अधिकारी के ट्रांसफर, पोस्टिंग की सिफारिश नहीं करेगा। इसके बाद आम आदमी ने तो तौबा कर ली कि वह तो किसी भाजपा नेता को काम नहीं बताएंगे। लेकिन खबर यह है कि आम आदमी को तो भाजपा नेता यह कह देते हैं कि हमे थाने जाने की मनाही है। सच यह भी है कि यदि वह थाने चले भी जाए तो सुनवाई नहीं होगी।
अब यह नियम भाजपा कार्यकर्ता और आम आदमी के लिए है। भाजपा नेताओं और आरोपी पुलिस वालों के लिए नियम नहीं है। सूत्र बताते हैं कि अब दरोगा और अधिकारी तो छोड़ो सिपाहियों तक ने भाजपा नेताओं को मैनेज कर लिया है। जिन पुलिस वालों के भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा नेताओं को आवाज उठानी है। वही भाजपा नेता आरोपी पुलिस वालों की सिफारिश में जा रहे हैं। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले क्राइम ब्रांच ने एक मोबाइल विके्रता को उसकी दुकान से उठाया था। क्राइम ब्रांच ने जिस समय उसे उठाया उस समय उसकी दुकान में रखे सभी मोबाइल भी उठा लिए। इनमें कुछ मोबाइल ग्राहकों के भी थे। जो रिपेयर होने के लिए आए थे। पुलिस ने मोबाइल विक्रेता को जेल भेज दिया। जेल से आने के बाद मोबाइल विक्रेता ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए एसएसपी से शिकायत की थी कि जो मोबाइल फोन उसके यहां से बरामद दिखाए गए हैं, उसमें से चार कीमती मोबाइल फोन क्राइम ब्रांच के सिपाहियों ने ले लिए है। सूत्र बताते हैं कि जब पुलिस कप्तान ने जांच कराई तो जांच में सिपाही फंस गए। जो मोबाइल विक्रेता से लिए गए थे, उन्हीं मोबाइल फोनों में सिपाही अपनी सिम डालकर चला रहे थे। अब जब जांच हुई तो पता चला कि सिपाही तो सिपाही क्राइम ब्रांच के रसोइए के पास भी महंगा मोबाइल फोन था। इसके बाद बड़ा तमाशा यह रहा कि जिन सिपाहियों के खिलाफ भाजपा नेताओं को ही कार्यवाही के लिए कहना था, उन सिपाहियों की सिफारिश में भाजपा नेता आ गए। भाजपा नेता ने एक व्यापारी नेता से संपर्क साधा और फैसले के लिए कहा। हालांकि भाजपा नेता का कोई निजी लालच नहीं था, लेकिन विंडबना यह है कि एक सिपाही ने अपनी सिफारिश में भाजपा नेता को मैनेज कर लिया। बताते हैं कि सिपाही अब पीड़ित के वकील के चैंबर तक भी पहुंचे है। इस बात का खुलासा करंट क्राइम ने पहले भी किया था, जब बताया गया था कि कबाड़ मोबाइलों को भी कीमती बताकर मामले को हाईप्रोफाइल किया गया है। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में वसीम नाम के एक आरोपी को चार दिन बैठाकर छोड़ दिया था। यह मामला भी चर्चाओं में रहा था।

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