बेस्ट आॅफ लक अखिलेश

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संकल्प और इरादों से ही बड़े से बड़ा लक्ष्य प्राप्त किया जाता है। खेमे बंदी के माहौल में राजनीति में एक युवा चेहरे ने पहली बार अपने दम पर परिवर्तन की ताल ठोकी है। एक मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सरकार की उपलब्धियों को लेकर कोई युवा रथ यात्रा लेकर जनता के बीच निकला है। इस पूरे घटनाक्रम को समाजवादी नजरिये से न देखकर परिवर्तन वादी और प्रयोग वादी नजरिये से देखा जाना चाहिये। चुनावों का ऊंट किस करवट बैठेगा यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में छिपा है। एक युवा मुख्यमंत्री ने इतना साहस तो दिखाया कि वह आलोचनाओं के माहौल में अपनी सरकार की उपलब्धियों को लेकर आत्म विश्वास से लवरेज है। जिस यूथ चेहरे पर यूपी की जनता भरोसा जता रही है, उस चेहरे पर उसकी ही पार्टी संशय जता रही है। पांच साल में एक भी आरोप एक युवा मुख्यमंत्री के दामन पर नहीं है। वरना लोग तो मंत्री बनते ही तेवर बदलने लगते हैं। दिल्ली की सरकार में आम आदमी पार्टी के मंत्रियों के रोज नित नये कारनामे इसी कड़ी का हिस्सा है। राजनीति का कल्चर बदलने का साहस दिखाया तो है। भ्रष्ट मंत्री को भी बाहर का रास्ता दिखाया तो दलाल को दलाल कहने का साहस जिस युवा सीएम ने दिखाया उसके जज्बे को पार्टीगत राजनीति की परिधि से बाहर आकर सलाम करना ही चाहिये। समकालीन राजनीति में अन्य दलों में कोई यूथ चेहरा इतनी लोकप्रियता हासिल नही कर पाया जितनी अखिलेश ने पांच साल के अल्प समय में अर्जित की है। राजनीति विरासत तो जयंत चौधरी और राहुल गांधी को भी मिली है। कांग्रेस के युवराज कहे जाने वाले राहुल गांधी भी यूपी में यात्रा लेकर निकले। संदेश जीरो रहा और खाट लुटी सो अलग। रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह के सुपुत्र जयंती चौधरी को भी राजनीति विरासत में मिली है। जयंती चौधरी शिक्षित, सौम्य चेहरा हैं। मगर यूथ को वह भी उस स्तर तक अपने से नहीं जोड़ पाये जितनी उनसे अपेक्षा की जाती है। यहां अखिलेश की खूबी यही है कि आज राजनीति पटल पर उनकी पहचान मुलायम सिंह यादव के पुत्र के रूप में नहीं बल्कि अखिलेश यादव के रूप में बनी है। तभी तो जब बात विचार धारा के द्वंद की आयी तो यूथ का सैलाब ‘आई एम विद अखिलेश’ के नारे के साथ उनके पक्ष में आ गया। प्रोफेसर रामगोपाल यादव तो 23 अक्टूबर को ही सुबह 6 बजे पत्र लिखकर कह चुके थे कि रथ यात्रा विरोधियों के गले की फांस है। इस फांस को और शार्प करना है। अब रथ यात्रा यह भी संदेश देगी कि नेतृत्व क्षमता केवल अधिकारों के बल पर नहीं आती। नेतृत्व क्षमता गुणों के आधार पर भी आती है। देश बदल रहा है, प्रदेश बदल रहा है। बहुत सी चीजे बदली हैं। जो कल तक इधर थे आज वो उधर हैं। बहरहाल एक युवा सीएम झंझावात से जूझते हुये जनता के बीच है। अपनी बात इन शब्दों के साथ…
‘मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर
लोग साथ आते गये और कारवां बनता गया’