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सामाजिक अंतर को पाटने का सेतु बनें लोकसेवक:नायडू

नयी दिल्ली| उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने लोकसेवकों से धनी -निर्धन, महिला – पुरुष और शहरी – ग्रामीण अंतर को पाटने का सेतु बनने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि उन्हें नये भारत के निर्माण कार्य में सक्रियता से जुटना चाहिए। श्री नायडू ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में वर्ष 2018 के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के द्वि- वर्षीय प्रशिक्षण के समापन समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक – आर्थिक रुप से पिछड़े लोगों का उद्धार लोकसेवकों का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होेंने सरदार वल्लभभाई पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकसेवकों को गरीबी और भेदभाव को खत्म करने के लिए ईमानदारी, अनुशासन, सरलता, जिम्मेदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्वता से अथक परिश्रम करना चाहिए।

उप राष्ट्रपति ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आकाशवाणी पर मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के संस्करणों को समाहित करने वाली पुस्तक ‘सिक्सटी फाइव कन्वर्सेशंस’ का लोर्कापण भी किया। इसे अकादमी ने प्रकाशित किया है। उन्होंने कहा, “ मेरी आपसे अपेक्षा होगी कि आप अपने काम को अपने मिशन के रूप में लें। ईमानदारी, समर्पण और संकल्प से राष्ट्र निर्माण का मिशन, देश में व्याप्त अनेक विषमताओं को समाप्त करने के मिशन, गरीब – अमीर का अंतर, पुरुष -महिला में अंतर, शहरी – ग्रामीण के बीच का अंतर, इन सब को समाप्त करने का मिशन, सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों का उत्थान आपका लक्ष्य होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि लोकसेवकों को अपनी जानकारी हरदम बढ़ाते रहना चाहिए। नई तकनीकों को सीखना चाहिए और उनमें निपुणता हासिल करनी चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों का यह तंत्र ही सुनिश्चित करता है कि सुविचारित नीतियां बनें और उन्हें कारगर ढंग से लागू किया जाए। उन्होंनें कहा कि नये भारत में आप जैसी युवा पीढ़ी के नए नेतृत्व के लिए अवसर पैदा हो रहे हैं।

 

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