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ग़ाजियाबाद दिल्ली एन.सी.आर

नोट बंदी ने लगाए राजस्व की रफ्तार पर बै्रक

13 दिनों के भीतर अकेले तहसील स्तर पर हुआ 130 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान
अशोक शर्मा (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। केंद्र सरकार के एक हजार ओर पांच सौ रुपये का नोट बंद करने के फैंसले के बाद भले ही बैंकों में हजार ओर पांच सौ रुपये के ढेर लग गये हैं, लेकिन जिस राजस्व से सरकार का खजाना बढ़ता है वहां रफ्तार लगभग बंद है। नोट बंदी के बाद लोग रजिस्ट्री कराने से भी हिचक रहे हैं। नोट बंदी के बाद लगभग 13 दिनों के भीतर 130 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकलन है। यह पैसा सरकार के खाते में आ सकता था, लेकिन जो लोग रजिस्ट्री कराना भी चाहते हैं, वह बैंकों की लाइन में लगे या फिर रजिस्ट्री करायें। केंद्र सरकार के इस फैंसले से राज्य सरकार के खजाने पर भी फर्क पड़ गया है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में हालात सुधरने नहीं जा रहे हैं बल्कि हालात अभी ओर अधिक जटिल हो जायेंगे। 8 नवंबर से पहले तहसील में रजिस्ट्रियों की बात की जाये तो एक अनुमान के मुताबिक हर रोज पांच सौ से लेकर छह सौ या फिर कभी कभार एक हजार रजिस्ट्रियां हुआ करती थी। नोट बंदी के बाद से रजिस्ट्री कार्यालय में रजिस्ट्री कराने का काम शून्य पड़ा हुआ है। रजिस्ट्री कराने के लिए इक्का दुक्का ही लोग पहुंच रहे हैं। तहसील के जानकारों का कहना है कि लोगों के पास जब पैसा नहीं है तो वह रजिस्ट्रिया कहा से कराये। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए नहीं तो नुकसान का आंकलन निरंतर बढ़ता रहेगा। सामान्य दिनों में सरकार को रजिस्ट्रियों के माध्यम से लगभग दस करोड़ रुपये रोजाना की कमाई हुआ करती थी, वह अब घटकर शून्य पर पहुंच गई है।
पुराने नोट के चलन का भी नहीं उठा रहे लोग लाभ
रजिस्ट्री का पंजीकरण कराने में अभी भी पुराने नोट अर्थात पांच सौ व एक हजार का नोट चलन में है, लेकिन लोग इतने डरे हुए हैं कि वह रजिस्ट्रिया कराने तक ही जहमत नहीं उठा रहे हैं। रजिस्ट्री का रजिस्ट्रेशन कराने में 20 हजार रुपये का पंजीकरण करना पड़ता है, जो पुराने नोटों में हो रहा है, लेकिन इस ओर कोई भी कदम नहीं उठा रहा है। जानकारों का कहना है कि पिछले 13 दिनों से रजिस्ट्री कार्यालय में चंद गिनती के लोग ही पहुंच सके हैं।

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