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डेढ़ साल से रेलवे स्टेशन पर शोपीस बनी है एटीवी मशीन

नई दिल्ली। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाई गई ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) डेढ़ साल से ठप पड़ी हैं। इनके बंद होने से यात्रियों को टिकट लेने के लिए काउंटर की लाइन में लगना पड़ता है। वहीं इस सुविधा से जुड़े रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का रोजगार भी समाप्त हो गया है। रेलवे प्रशासन से यात्रियों की सुविधा के लिए हर स्टेशन पर ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन लगाई हुई हैं। इन मशीनों से कोई भी यात्री एटीएम की तरह अपना कार्ड इस्तेमाल करके जनरल टिकट ले सकता है। गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर इस तरह की चार मशीन लगाई गई है। यात्रियों को दिक्कत न हो इसके लिए इन मशीनों से टिकट जारी करने का लाइसेंस सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को दिया गया है। यह कर्मचारी मशीन पर खड़े होकर अपने कार्ड के जरिए यात्रियों को उनकी दूरी के अनुसार टिकट निकालकर देते हैं। रेलवे इसके लिए उनके जारी टिकट के अनुसार कमीशन देती है। कोरोना काल में ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद इन मशीनों को भी बंद कर दिया गया। अनलॉक के बाद ट्रेन तो शुरू हुई लेकिन यह मशीन चालू नहीं हो सकी। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से लगी यह मशीन अब डेढ़ साल से बंद होने के कारण शोपीस बन गई हैं। इन मशीन के जरिए गाजियाबाद से देश के किसी भी कोने में जाने वाली ट्रेन का साधारण टिकट प्राप्त किया जा सकता है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस समय किसी भी आरक्षित ट्रेन में जनरल टिकट लेकर यात्री करने पर पाबंदी है। वहीं लोकल ट्रेनों में भी न्यूनतम किराया 30 रुपये का है। इन मशीनों में सॉफ्टवेयर पुराना है। इसमें न्यूनतम किराया 10 रुपये का टिकट ही निकल सकता है। इसकी कारण इन मशीनों को चालू नहीं किया जा सका है। यह मशीन रेलवे के एक अतिरिक्त काउंटर की तरह काम करती है। मशीनों पर खड़े रेलवे कर्मचारी यात्रियों के उनकी यात्रा के टिकट का पैसा लेकर टिकट देते हैं। यात्रियों से वह कैश लेते हैं जबकि टिकट का पैसा उनके कार्ड से कट जाता है। यात्री के यहां से टिकट खरीदने में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होता है। जितने पैसा का टिकट काउंटर पर होता है उतने की पैसे का टिकट इससे भी जारी होता है।

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