और भी गम हैं जमाने में मैगी के सिवा

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दो मिनट में बनने वाली मैगी, कई दिनों से चर्चाओं में है। खाद्य विभाग की जांच में इनमें ऐसे तत्व पाए गए हैं जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक हैं। (latest news ghaziabad in hindi) किडनी लीवर को नुकसान पहुंचाने वाले इन तत्वों का जैसे ही खुलासा हुआ, मानो पूरे देश में मैगी हटाओ अभियान एक साथ छिड़ गया। एक साथ कई राज्यों ने मैगी की बिक्री पर बैन लगा दिया। टीवी, अखबारों, सोशल मीडिया सहित तमाम संचार के साधनों पर मैगी-ही-मैगी दिखाई देने लगी है। ऐसा लगा जैसे पूरा देश तीनों टाइम पर खाने में मैगी ही खा रहा हो। लोगों ने घरों में मैगी की एंटी पर ब्रेक लगा दिया। ऐसा होने से नेस्ले कंपनी को बाजार से अपने पूरे स्टॉक को उठवाना पड़ा। माना कि मैगी में खतरनाक कैमिकल पाए गए हैं और इस पर रोक लगना भी जरूरी है, लेकिन जिस हिसाब से मीडिया इस पर अपनी ताकत लगा रही है उसे देखकर यह लग रहा है कि हमारे मुल्क में मैगी से बड़ा कोई मुद्दा ही नहीं है। जमाने में और भी गम हैं जो मैगी से बढ़कर हैं, लेकिन इन सब पहलुओं से मैगी का मुद्दा कुछ खास लग रहा है। क्या सेहत के साथ खिलवाड़ करने में मैगी अकेली ही जिम्मेदार है। आज भी मार्केट में ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जिनकी पूरी ईमानदारी से जांच करा ली जाए तो जनता की सेहत से हो रहे खिलवाड़ की हकीकत सामने आ जायेगी। मैगी के सेम्पल का खुलासा करने वाले अधिकारी इसे बहुत बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। पैकेट फाड़कर जांच कर लेना बहुत बड़ा तीर मारने के बराबर नहीं है। असली कार्रवाई तो तब मानी जाएगी जब यह खाद्य विभाग के अधिकारी मंडियों, मिष्ठान की दुकान, होटलों, मसाला बनाने वाली कंपनियों, खुले में बिकते फलों, सड़कों पर लगीं चाइनीज वैन, स्कूल में चलने वाली कैंटीन, सरकारी स्कूल के बच्चों को दी जाने वाली मिड-डे-मील, जनता की जेब पर डाका डालते विदेशी फूड स्टोर पर भी अपने जांच के दायरे को बढ़ाएं। लेकिन मैगी के खुलासे के बाद ऐसा लग रहा है कि अधिकारियों ने आज तक इसके अलावा कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की है। देश कई संकटों से गुजर रहा है। नक्सली हमले हो रहे हैं, किसान फसल बर्बादी से आत्महत्या कर रहा है। कम मानसून की भविष्यवाणी ने फिर अन्नदाता की चिन्ता बढ़ा दी है। तमाम परेशानियां सिर पर खड़ीं जो दो मिनट में दूर होने वाली नहीं हैं ऐसे में मैगी का ढिंढोरा बहुत पिट चुका कुछ जनता की भलाई के लिए और भी सोच लिया जाये।
धन्यवाद। मनोज कुमार