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‘स्कॉर्पीन परियोजना में कोई देरी नहीं, भारत बदलाव में सक्षम’

नई दिल्ली| स्कॉर्पीन पनडुब्बियों से जुड़े दस्तावेजों के लीक होने के मामले की जांच के बीच नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि इस घटना से पनडुब्बियों की परियोजना प्रभावित होगी। उनका कहना है कि परियोजना की पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवारी को साल के अंत तक नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। अभी यह सामुद्रिक परीक्षण से गुजर रही है। आस्ट्रेलिया के एक अखबार ने लीक दस्तावेज छापे हैं। यह 22400 पन्नों के हैं। भारतीय नौसेना का कहना है कि इससे पनडुब्बियों की क्षमता पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। और, अब एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो ‘सबसे खराब स्थिति को ध्यान में रखते हुए’ यह कह सकते हैं कि भारत के पास इस पनडुब्बी में आवश्यक बदलाव करने की पूरी क्षमता है। अधिकारी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो किसी भी चरण में यह बदलाव किए जा सकते हैं। अधिकारी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि आईएनएस कलवारी साल के अंत तक नौसेना में शामिल हो जाएगी। ट्रायल के अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। अभी तक तो ऐसा नहीं है कि लीक से नियत कार्यक्रम पर कोई प्रभाव पड़ा हो।” उन्होंने कहा कि अन्य पांच पनडुब्बियों को नौ-नौ महीने के अंतराल पर नौसेना में शामिल किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पनडुब्बियां हम ही बना रहे हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर हम इसमें जरूरी बदलाव कर सकने में सक्षम हैं।” अधिकारी ने साथ ही कहा कि ‘फिलहाल, इस समय’ उन्हें नहीं लगता कि ऐसे किसी बदलाव की जरूरत है।

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