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सम्पादकीय

वैकल्पिक व्यवस्था बेहद जरूरी

कई बार देखने को मिला है कि हड़ताल हो जाती है और बड़ी संख्या में जनता को समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। हड़ताल कभी लंबी चलती है तो कभी कुछ दिन चलने के बाद समाप्त भी हो जाती है, लेकिन लोगों की समस्याओं की तरफ किसी भी सरकारी तंत्र का कोई ध्यान नहीं जाता है। (ghaziabad hindi news) सरकारी तंत्र को यह भली भॉति सोचना चाहिए कि जो संगठन हड़ताल कर रहा है उससे जनता से क्या नाता है और यदि हड़ताल हुई तो जनता पर इसका क्या फर्क पड़ेगा। जनता पर पड़ने वाले फर्क को दूर करने की दिशा में सरकारी तंत्र को मजबूत स्थिति तैयार करनी चाहिए ताकि जनता की समस्याओं का निवारण समय पर हो सके। इन दिनों मांगों को लेकर आॅटो संचालकों व ट्रक संचालकों ने हड़ताल की हुई है। हड़ताल का असर साफ तौर पर नजर आ रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों पर आसानी से देखा जा सकता है कि लोग एक गातंव्य से दूसरे गातंव्य जाने के लिए खड़े हुए हैं और उन्हें कोई सवारी नहीं मिल रही है। इसके अलावा ट्रक संचालकों की हड़ताल ने भी जनपद के कारोबार पर ब्रेक लगा दिए हैं। सवाल यह उठता है कि सरकारी तंत्र को यह सोच तैयार करनी चाहिए यदि कोई संगठन हड़ताल करता है तो इसका असर कहां कहां पर होगा। ज्यादा असर ना हो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, ताकि जनता को ज्यादा समस्याओं का सामना ना करना पड़े। आॅटो संचालकों की हड़ताल के कारण लोग बेहाल है और शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में खासी कठिनाईयों का सामना भी करना पड़ रहा है। आॅटो चालकों की हड़ताल के कारण ही विजयनगर क्षेत्र में एक महिला अपने बच्चों को लेकर सड़क किनारे खड़ी थी, लेकिन कोई आॅटो नहीं आने के कारण एक कार चालक ने लिफ्ट देकर उस महिला के साथ लूटपाट की। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए भी सरकारी तंत्र को एक मजबूत स्थिति तैयार करनी होगी, तभी समस्याओं का निवारण हो सकेगा, और सरकारी तंत्र को होने वाली हड़तालों के असर का विकल्प भी तलाशना होगा। धन्यवाद! मनोज गुप्ता

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