सब गोलमाल है: सरकारी गेहंू की कालाबाजारी में रंगे हैं कई हाथ

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अरूण वर्मा (करंट क्राइम)

मोदीनगर। सरकारी राशन की शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर कालाबाजारी की जा रही है। जितना कोटा मिलता है उसका आधा भी उपभोक्ताओं को नही मिल रहा है। इस कालाबाजारी के धंधे में एक ही बल्कि अनेक लोगों के हाथ काले हैं। जिसमें आपूर्ति विभाग, राशन डीलर व अधिकारी तक शामिल होकर अपनी जेबें गर्म करने में लगे हैं। गरीबों का क्या वह तो कहीं और लाइन का इंतजार करेंगे। सब कुछ जानकर भी प्रशासनिक अधिकारी अनजान बने हंै।
आओं जानें क्या है राशन वितरण की प्रक्रिया
खाद्य सुरक्षा बिल लागू होने के बाद सरकार द्वारा यह व्यवस्था लागू की गई है कि अब राशन का गेहूं सिर्फ बीपीएल, अन्त्योदय व एनएफएस कार्डधारकों को ही मिलेगा। इसमें खाद्य बिल सुरक्षा अधिनियम में यह व्यवस्था भी की गई कि जिनके पास पक्का आवास नही है और वह निर्धन श्रेणी में आते हैं, उनके राशन कार्ड पर यह अतिरिक्त रुप से दर्ज होगा। जिसके चलते उन्हें दो रुपये किलो की दर से एक यूनिट पर तीन किलोग्राम प्रतिमाह गेहूं व एक यूनिट पर तीन रुपये किलोग्राम के हिसाब से चावल उपलब्ध कराया जाता है।
विदित हो कि ब्लाक भोजपुर स्थित एफसीआई का एक गोदाम व कपड़ा मिल परिसर में एसएमआई का एक गोदाम है, जिसमें गेहूं आता है। ग्रामीण क्षेत्र के डीलर भोजपुर गोदाम व शहरी क्षेत्र के कपड़ा मिल परिसर में स्थित गोदाम से गेहूं उठाते हैं।
तहसील क्षेत्र में लगभग
124 राशन डीलर
मोदीनगर शहरी क्षेत्र में 57 व ग्रामीण क्षेत्रों में 67 राशन की दुकानें हैं। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में करीब एक लाख एनएफएस कार्डधारक हंै। एक यूनिट पर दो रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से तीन किलोग्राम गेहूं व एक यूनिट पर तीन रुपये के हिसाब से दो किलोग्राम चावल प्रतिमाह बांटने को दिया जाता है। इस गेहूं पर वितरक को लगभग 70 पैसे प्रति किलोग्राम का कमीशन दिया जाता है, लेकिन इससे ज्यादा का उसका खर्च आ जाता है। ऐसे में तमाम खर्च और राशन एजेंसी को बांटने के साथ अपनी बचत के लिए राशन वितरक माफियाओं के साथ मिलकर गरीबों के राशन पर डाका डालने से भी नहीं कतराते हैं। जिससे उन्हें गरीबों के राशन से मोटी आमदनी तो होती है, वहीं अधिकारियों के भी वारे-न्यारे हो रहे हंै।
मिलों पर जाता है गेहूं
सूत्रों की मानें तो एफसीआई गोदाम से एसएमआई गोदाम तक गेहूं सीधे आता है। यहां से गेहूं राशन माफियाओं के यहां पहुंच जाता है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय राशन माफिया राशन वितरकों से संपर्क बनाए रखते हैं और नकद भुगतान के माध्यम से पूरा गेहूं उठा लिया जाता है। जहां से यह गेहूं सरकारी मुहर लगे बोरों से पलट कर निजी बोरों में भरकर निजी आटा मिलों पर भेजा जा रहा है।
2 रुपये का गेहंू 17 में बिक रहा
गरीबों को 2 रुपये किलो के हिसाब से मिलने वाले इस राशन को निजी आटा चक्की, मिल संचालक 17 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से खरीदकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। गरीब है कि अपने राशन को पाने के लिये दर-दर की ठोकर खा रहा है। अगर सूत्रों से मिली जानकारी को सच माना जायें तो राशन वितरक से राशन माफिया दस रुपये किलोग्राम में गेहंू खरीदकर सात रुपये में से एसएमआई व जिला पूर्ति कार्यालय को हिस्सा देता है। उसे करीब छह रुपये मिलते हैं, वहीं राशन माफिया मिलों पर 16 से 17 रुपये की दर से बेचता है। पुलिस प्रशासन और आपूर्ति विभाग का हिस्सा भी होता है।
ज्ञात रहे कि गतवर्षों में कपड़ा मिल स्थित एसएमआई के गोदाम पर तत्कालीन एसडीएम ने छापामार कार्रवाई करते हुए मौके से निजी टैंपू में भर कर जा रहे गेहंू के करीब 84 बोरे बरामद किये थे। इतना ही नही इस मामले में वहां मौजूद एसएमआई के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई थी। इसके अलावा गतवर्ष पूर्व भोजपुर एफसीआई गोदाम से छोटे हाथी में भरकर चला गेहूं रास्ते में पकड़ा गया। इसके अतिरिक्त पहले भी अनेक बार छापेमारी की कार्रवाई में राशन का गेहूं पकड़ा जा चुका है।
तहसील क्षेत्र के गांव खिंदौड़ा समेत करीब दर्जनभर गांव के लोगों ने कुछ दिनों पूर्व राशन वितरक पर गंभीर राशन ब्लैक करने का गंभीर आरोप लगाते हुए तहसील पर जमकर प्रदर्शन किया था तथा आये दिन शहरी व ग्रामीण राशन कार्ड धारक आलाअफसरों के समक्ष राशन वितरण में हो रही धांधली की शिकायत दर्ज कराते रहते हैं, लेकिन जांच की बात कहकर मामला रफादफा कर दिया जाता है। शासन से प्रतिदिन दुकान खोलने के आदेश हैं, परंतु राशन की दुकानें राशन वितरण के दिन ही खोली जाती हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में खाद्य आपूर्ति निरीक्षक सत्य प्रकाश मालवीय का कहना है कि अब राशन की कालाबाजारी करना कठिन है। क्योंकि बायोमैट्रिक सिस्टम से राशन का वितरण होता है। उनका कहना है कि फिर भी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जायेगी।
राशन डीलर का क्या कहना
इस संबन्ध में जब शहरी क्षेत्र के कई राशन डीलरों से बातचीत की गई तो उन्होंने एक ही जवाब दिया कि बायोमैट्रिक सिस्टम से राशन वितरण किया जाता है। इसमें किसी तरह की घपलेबाजी की संभावना नही है।