अखिलेश को महंगा पड़ा महागठबंधन, पांच सीटों पर सिमटी सपा, शून्य से दस पर पहुंचीं बसपा

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लखनऊ (ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचंड लहर पर सवार होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजप) लगातार दूसरी बार केंद्र में सरकार बनाने जा रही है। शाह की रणनीति और मोदी का चमत्कारिक प्रभामंडल विपक्षी दलों पर भारी पड़ गया। उत्तर प्रदेश में कयास लगाए जा रहे थे कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन भाजपा को तगड़ी चोट पहु्चाएगा, लेकिन यह अनुमान पूरी तरह गलत साबित हुआ।
सपा, बसपा और रालोद ने मिलकर जो महागठबंधन बनाया था, वह यूपी में कोई असर नहीं दिखा पाया। इस गठबंधन से सपा को नुकसान हुआ जबकि रालोद का सूपड़ा साफ हो गया। इसका सबसे ज्यादा फायदा मायावती की पार्टी को हुआ। उल्लेखनीय है कि 2018 के उप-चुनाव में कैराना, गोरखपुर और फूलपुर के नतीजों ने इस उम्मीद को हवा दी कि सपा और बसपा का गठबंधन मोदी लहर को रोक सकता है। हालांकि, ऐसा न हो सका और सपा व बसपा मिलकर महज 15 सीटें ही जीत पाईं।
2014 के आम चुनाव में यह गनीमत रही थी कि समाजवादी पार्टी प्रमुख के परिवार के पांच सदस्य अपनी सीटें बचाने में सफल हुए थे। इस बार अखिलेश की पत्नी डिंपल और उनके भाई धर्मेंद्र और अक्षय चुनाव हार गए हैं। इस बार सिर्फ सपा प्रमुख अखिलेश और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ही अपनी सीटें बचा पाए। रालोद चीफ अजित सिंह को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा। उन्हें भाजपा के संजीव बालियान ने पराजित किया।
अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी भी बागपत से चुनाव हार गए हैं। आरएलडी मथुरा सीट पर भी हार गई। हालांकि, सबसे ज्यादा फायदा मायावती को हुआ है। बसपा ने 10 सीटें जीती हैं। यह वही बसपा है, जिसे 2014 में एक भी सीट नहीं मिली थी। यह साफ हो गया है कि सपा के वोट बसपा को तो ट्रांसफर हुए हैं, लेकिन बीएसपी किसी तरह भी सपा के लिए मददगार साबित नहीं हुई।
उल्लेखनीय है कि गठबंधन के तहत सपा ने 37, बसपा ने 38 और रालोद ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था। गठबंधन का मकसद था कि तीनों पार्टियों का कोर वोटर एकजुट होकर गठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सपा का 2014 में यूपी में वोट शेयर 22.35 प्रतिशत था। गुरुवार शाम तक की मतगणना के हिसाब से उन्हें इस बार 17.97 प्रतिशत वोट ही मिले थे।
वहीं, बसपा को 2014 में 19.77 प्रतिशत वोट मिले थे। गुरुवार शाम तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार भी मायावती की पार्टी को 19.28 फीसदी वोट मिले हैं। भाजपा की बात करें तो भले ही 2014 के मुकाबले पार्टी को कुछ सीटों का नुकसान हुआ हो, लेकिन उसका वोट शेयर बढ़ा है। भाजपा को 2014 में यूपी में 42.63 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार पार्टी को 49.5 फीसदी मत हासिल हुए हैं।