मायावती की परेशानी का शबब बना अखिलेश का यह निर्णय

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BSP Supreemo Mayawati addressing press conference at her official residence in Lucknow on Saturday. Express Photo by Vishal Srivastav. 24.03.2018.

नई दिल्ली (ईएमएस)। उत्तर प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच गठबंधन हो गया है। उनके बीच सीटों का भी बटवारा हो चुका है। चुनाव की दहलीज पर खड़ी बसपा सुप्रीमो के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पहल अब उनके गले की हड्डी बन गई है। यह मामला मायावती के मुख्यमंत्री रहते बने पार्को और स्मारकों में अपनी और बसपा के चुनाव चिह्न हाथी की प्रतिमाएं लगाए जाने में हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। इस हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि मूर्तियों पर खर्च धनराशि को मायावती को लौटानी चाहिए।
लोकसभा चुनाव में एक ही नाव पर सवार सपा प्रमुख अखिलेश बसपा के कार्यकाल में बनी इन प्रतिमाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उत्तर प्रदेश की गद्दी संभालने के बाद अखिलेश यादव ने ही मायावती के कार्यकाल में बने पार्कों और स्मारकों की लोकायुक्त से जांच का आदेश दिया था। लोकायुक्त की जांच में लखनऊ और नोएडा में बने पार्कों और स्मारकों में 1,400 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का अनुमान लगाया गया था। यही नहीं, लोकायुक्त की सिफारिश पर अखिलेश यादव की सरकार ने पूर्ववर्ती मायावती सरकार के दो मंत्रियों नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबूसिंह कुशवाहा समेत 19 लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा भी दर्ज करवाया था। अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह मामला गरमा गया है। चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने अपनी प्रतिमाओं पर 3.49 करोड़ रुपए, अपने राजनीतिक गुरु कांशीराम की प्रतिमाओं पर 3.77 करोड़ रुपए और अपनी पार्टी के चुनाव चिह्न हाथी की मूर्तियों पर 52.02 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यानी सभी प्रतिमाओं पर 59 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।